10 साल के मनोज कुमार ने लाठी से डॉक्टर और नर्स को पीटा, मां बेटे का ये प्यार जान पसीज उठेगा दिल
Manoj Kumar Childhood Story: 24 जुलाई 1937 को एबटाबाद ब्रिटिश इंडिया (अब खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान) में एच एल गोस्वामी के घर लड़के ने जन्म लिया। बड़े जतन से उसका नाम हरिकृष्ण गोस्वामी रखा गया, जो बाद में मनोज कुमार बने। जब वो 10 साल के थे तब भारत और पाकिस्तान का बटवारा हुआ। इसके बाद वो अपने परिवार के साथ भारत के दिल्ली शहर में आकर बस गए। वो यहीं शरणार्थी शिविर में पले बढ़े।
हरिकृष्ण गोस्वामी 10 साल के थे, तब उनके छोटे भाई कुक्कू का जन्म हुआ। 2 महीने बाद उनकी मां और कुक्कू की तबीयत अचानक बिगड़ गई। दोनों की अस्पताल में भर्ती करवाया गया। तभी दंगे भड़क उठे। चारों तरफ सिर्फ अफरा तफरी मची हुई थी और सब अपनी-अपनी जान बचाकर भाग रहे थे। इसमें अस्पताल का स्टाफ भी शामिल था।

दंगे के दौरान जब जब सायरन बजता तब डॉक्टर और नर्स अपनी जान बचान के लिए अंडरग्राउंड हो जाते थे। इसी वजह से मनोज कुमार के भाई और उनके 2 महीने के भाई कुक्कू का निधन हो गया। जब मनोज की मां की हालत गंभीर थी तो वो बहुत तकलीफ में अस्पताल में चिल्लाती रहती थीं। बावजूद इसके उनके इलाज के लिए कोई भी डॉक्टर नहीं आता। यहां तक की नर्सें भी नदारद रहतीं। अस्पताल स्टाफ का ये रवैया देख मनोज को भयंकर गुस्सा आया। तब उन्होंने एक लाठी उठाई और अंडरग्राउंड हुए डॉक्टर्स और नर्स पर बरसाना शुरू कर दिया। मनोज को अपनी मां का दर्द नहीं देखा जा रहा था। उनके गुस्से पर पिता ने काबू और जान बचाने के लिए वो पकिस्तान छोड़ भारत बसने के लिए आ गए।
इसके बाद मनोज और उनका परिवार जंडियाला शेर खान से दिल्ली आया। दो महीनों तक वो रिफ्यूजी कैंप से रहे। जैसे-जैसे समय बीता दंगे भी कम होने लगे। बाद में उनका परिवार दिल्ली में ही बस गया। यहीं हिंदू कॉलेज से मनोज ने अपनी पढ़ाई पूरी की। बात दें, उन्हें बचपन से ही फिल्मों का शौक था। वो दिलीप कुमार और अशोक कुमार के प्रशंसक थे।












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