Durg: सुविधाओं का अभाव, फिर भी खिलाड़ियों ने हासिल किया पदक, खेल संघों का अनुदान राशि से मोह भंग
पूरा देश आज राष्ट्रीय खेल दिवस पर उन सभी खिलाड़ियों को याद कर रहे है जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और भारत को पहचान दिलाई, वहीं कुछ खेल संघ अपने उत्कृष्ठ खिलाड़ियों का सम्मान कर रहें हैं।
दुर्ग, 29 अगस्त। पूरा देश आज राष्ट्रीय खेल दिवस पर उन सभी खिलाड़ियों को याद कर रहे है जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और भारत को पहचान दिलाई, वहीं कुछ खेल संघ अपने उत्कृष्ठ खिलाड़ियों का सम्मान कर रहें हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सुविधाओं के अभावों के बाद भी खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुर्ग जिले का नाम रौशन किया है।

स्वयं के खर्चो से करा रहे आयोजन
कई वर्षों में हुई प्रतियोगिता व प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के बाद भी अनुदान की बकाया लाखों रुपए की राशि विभाग द्वारा स्वीकृति न करने के कारण खेल संघों के प्रतिनिधि संचालक दफ्तार के चक्कर काटना ही बन्द कर दिया है। खेल संघो ने अनुसार शुरुआत में प्रतियोगिताएं कराने जितना फंड मिलता है। उतना खिलाड़ियों को भेजने में खर्चा हो जाता है, ऐसे में संघों ने खुद के संसाधनों का उपयोग करना ही बेहतर समझा और सरकारी फंड से तौबा कर ली।

सात संघो ने नही लिया अनुदान
एक तरफ सरकार खेल संघों को लाखों रुपए का अनुदान हर साल मुहैया करा रही है, जबकि जिले में ही सात ऐसे खेल संघ भी है। जिनमें प्रदेश तैराकी संघ दुर्ग, कुश्ती संघ दुर्ग, महिला क्रिकेट संघ दुर्ग, बॉक्सिंग संघ दुर्ग, रोलबॉल संघ दुर्ग, कार्फबॉल संघ दुर्ग शामिल है। जिन्होंने 10 साल से अनुदान का एक रुपया तक नहीं लिया। कुश्ती, बॉक्सिंग और तैराकी जैसे ओलंपिक खेलों के इन संघों ने एक दशक से खेल एवं युवा कल्याण विभाग से अनुदान का रिश्ता तोड़ दिया है।

जिले के खिलाड़ियों का इन खेलों में है दबदबा
इन तमाम अभावों के बाद भी जिले में खिलाड़ियों ने अन्य राज्यों और देशों में जाकर अपना लोहा मनवाया है। जैसे बीसीसीआई इमर्जिंग क्रिकेट टूर्नामेंट में दुर्ग का विजय यादव भी शामिल हुआ। वे सीएससीएस के श्रेष्ठ खिलाड़ियों की सूची में शामिल हैं। कॅामन वेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप लंदन की गर्ल्स केटेगरी में दुर्ग शहर की वेदिका खुशी रावना ने कांस्य पदक जीता है। वेदिका केरला स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में प्रैक्टिस करती है। छोटी बहन पुंजिका रावना भी केरला साई में हैं। शिखर सिंह ने वॉलीबॉल इंडिया कैंप जूनियर इंडिया टीम में अंडर-21 में शानदार खेल के बूते इस खिलाड़ी ने इंडिया कैंप में जगह बनाई। वर्तमान में भारतीय नौसेना में कार्यरत शिखर सर्विसेज के लिए खेलते हैं। बीते वर्ष नेशनल में सिलवर मेडल हासिल किया। पॉवर लिफ्टिंग में दुर्ग का सितारा संतोष मांझी को माना जाता है। राजीव पांडेय अवॉर्ड से सम्मानित होने के साथ ही साथ यह खिलाड़ी एशिया मेडलिस्ट है। वर्तमान में रेलवे की टीम के साथ प्रैक्टिस करती हैं। आधा दर्जन अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा खेल चुकी है।

आकर्षी कश्यप ने बढाया मान
राष्ट्रमण्डल खेल 2022 में सिल्वर मेडल जीतने वाली 21 वर्षीय आकर्षि कश्यप दुर्ग जिले की निवासी है। वे छत्तीसगढ़ में बैडमिंटन खेलते हुए बैडमिंटन की सभी वर्ग की नेशनल चैम्पियन रही है। अंडर-13,15,17,19 में नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल व सीनियर नेशनल में भी पदक हासिल किया। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम में अंडर-19 बैडमिंटन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल लेने के बाद आकर्षी अब तेजी से सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो चुकी है। लेकिन उनके ही शहर में खिलाड़ी और खिलाड़ियों की सुविधाओं का अभाव है। इंडोर स्टेडियम में एक बैडमिंटन कोर्ट बनाने में तीन साल लग गए। कोर्ट के नाम पर वुडन फ्लोर लगाकर पेंट से लाइनें खीच दी गई है।
जिम्मेदारों ने दिया जवाब
सहायक संचालक विलियम लकड़ा का कहना है कि तय प्रक्रिया के तहत अनुदान दिया जाता है। कई खेल संघों ने पंजीयन नहीं लिया है और न ही अनुदान लेते हैं। कई संघों ने नवीनीकरण भी नहीं कराया है। वहीं तैराकी संघ के उपाध्यक्ष और ट्रेजरार ओलंपिक एसोएिसशन सहीराम जाखड़ का कहना है कि जितना अनुदान मिलता था, उससे प्रशिक्षण और प्रतियोगिता संपन्न कराना मुश्किल था। इसलिए अनुदान नहीं लेते। जिले के खिलाड़ी पॉवर लिफ्टिंग से लेकर बॉक्सिंग, क्रिकेट हर जगह शानदार प्रदर्शन रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हमेशा मेडल लाए हैं। यह गौरव की बात है।












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