CG: भाजपा के प्रदेश संगठन के बाद, कमजोर परफॉर्मेंस वाले जिलाध्यक्षों की बारी, जल्द ही जारी होगी सूची
प्रदेश भाजपा आगामी चुनाव को लेकर सक्रिय हो चुकी है। प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष की टीम की सूची जारी होने के बाद अब भाजपा जिलाध्यक्षों की सूची तैयार कर ली है। जिसमें प्रदेश के लगभग 17 जिलाध्यक्ष बदले जाने की उम्मीद हैं,
दुर्ग, 12 सितम्बर। छत्तीसगढ़ में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने संगठन की कार्यकारिणी घोषित कर दी है। भाजपा ने इस कार्यकारिणी के माध्यम से सन्देश दिया है कि प्रदेश भाजपा आगामी चुनाव को लेकर सक्रिय हो चुकी है। प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष की टीम की सूची जारी होने के बाद अब भाजपा जिलाध्यक्षों की सूची तैयार कर ली है। जिसमें प्रदेश के लगभग 17 जिलाध्यक्ष बदले जाने की उम्मीद हैं, क्योंकि इससे पहले नगरीय निकाय चुनाव परिणाम में जिला संगठन का परफॉर्मेंस कमजोर रहा है।

दुर्ग से किसी भी नेता को प्रदेश में नही मिला दायित्व
भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बदलने के बाद प्रदेश भाजपा के पूर्व संगठन के नेताओ युवा मोर्चा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष को भी हटा कर नई नियुक्ति कर दी है। यानी अब भाजपा किसी भी तरह से कमजोर परफॉर्मेंस वाले संगठन के साथ आगामी चुनाव में नही जाना चाहती इसलिए बड़े बदलाव किए गए हैं। इस सूची में दुर्ग के किसी भी भाजपा नेता का नाम नही है। इससे साफ है कि दुर्ग जिले में बड़े बदलाव करने के मूड में प्रदेश संगठन है।

बदलेंगे 17 जिलाध्यक्ष, एक दो दिनों के भीतर जारी होगी सूची
छत्तीसगढ़ में भाजपा ने अपने जिलाध्यक्षो की सर्वे के आधार पर जानकारी ली है,कि राष्ट्रीय संगठन और प्रदेश संगठन के निर्धारित कार्यक्रमों के सफलता पूर्वक आयोजन में नेता कितने सक्रिय नजर आए। बीते नगरीय निकाय चुनाव में जिले संगठन की क्या भूमिका रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 साल पूरा करने पर संगठन द्वारा निर्धारित कार्यक्रम को किस तरह से पूर्ण किया गया। जिसमे 12 जिलों के जिलाध्यक्ष कमजोर पाए गए। इसके साथ ही वर्तमान सरकार के खिलाफ आंदोलनों में वर्तमान जिलाध्यक्षों की भूमिका भी देखी जा रही है। इसके साथ ही बहुत से जिलाध्यक्षों का 3 वर्ष का कार्यकाल भी पूर्ण हो चुका है। जिसके बाद उन्हें रिप्लेस करने की तैयारी संगठन ने पूरी कर ली है।

दुर्ग में गुटबाजी से नाराज है संगठन
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के आने के बाद दुर्ग जिले में गुटबाजी चरम पर है। यहां के भाजपा नेताओ में सार्वजनिक रूप से टकराव कई बार देखा गया है। जिससे भाजपा के दिग्गज नेताओं के समर्थक और कार्यकर्ता आपस में बटे हुए हैं। जिला संगठन के संचालन और उसके कार्यशैली पर जिले के पूर्व विधायक और सांसद ही सवाल उठाते रहें हैं। इस गुटबाजी से भाजपा के वरिष्ठ नेता भी वाकिफ हैं। लेकिन कांग्रेस सरकार के तीन मंत्री और मुख्यमंत्री वाले Durg जिले में इस तरह की गुटबाजी आने वाले विधानसभा चुनाव में परेशानी बन सकती है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को एक करना भी एक चुनौती है।

भाजपा नेताओं में आक्रामकता का अभाव
छत्तीसगढ़ में 15 साल तक सरकार में रहने वाले भाजपा नेताओं में वर्तमान सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए अक्रामकता की कमी के साथ जानकारी का अभाव भी देखा जा रहा है। इससे पहले बैठक में सभी जिलाध्यक्ष महामंत्रियों और प्रवक्ताओं को संगठन और राजनीतिक हिस्ट्री की जानकारी बढाने के निर्देश दिए गए थे। इसके अभाव में नेता अपने क्षेत्रों में वर्तमान सरकार पर हमला बोलने में असफल नजर आते हैं। लेकिन कई नेताओं ने इसमें सुधार नहीं किया अब ऐसे नेताओं को रिप्लेस किया जाएगा।

संघ बैकग्राउंड से हो सकता है अगला जिलाध्यक्ष
प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष अरुण साव और नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल दोनों ही संघ से जुड़े हुए नेता रहें हैं। वहीं दुर्ग जिले में भी संघ से जुड़े हुए किसी नेता को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके साथ साथ प्रदेश के अन्य जिलों में भी गुटबाजी से दूर रहने वाले संघ से जुड़े किसी नेता को पार्टी जिलाध्यक्ष बना सकती है। दुर्ग डॉ शिवकुमार तमेर के बाद ज़ितेन्द्र वर्मा को जिलाध्यख बनाकर पार्टी ने यह मैसेज दिया हैं। कि अब गुटबाजी से हटकर कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही जिलाध्यक्ष आर्थिक, सामाजिक रूप से भी सक्षम होने चाहिए। जिसका संगठन में किसी प्रकार का कोई विरोध न हो।












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