CG में अविमुक्तेश्वरानंद ने फाड़ी थी किताब, अब मिला राज्य अतिथि का दर्जा, संचार कार्यक्रमों में होंगे शामिल
छत्तीसगढ़ में इन दिनों स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों को लेकर जमकर राजनीतिक बयान बाजी की जा रही है। अविमुक्तेश्वरानंद को अब राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया है।

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द इन दिनों छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। इस दौरान उनके द्वारा दिए गए बयान भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द को राज्य सरकार के शिष्टाचार विभाग ने राज्य अतिथि का दर्जा दिया है। क्योंकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द संचार कार्यक्रम के तहत अब छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे।
संचार कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे शंकराचार्य
दरअसल ज्योतिषपीठ शंकराचार्य हिमालय के मीडिया प्रभारी अशोक साहू ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद छत्तीसगढ़ बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, चांपा, जांजगीर, कोरबा रायपुर, बलौदा-बाजार के जिले पर के प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे मुख्य वक्ता के रूप में धार्मिक व सामाजिक सभाओं को संबोधित भी करेंगे। जिसके लिए राज्य सरकार ने उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिया है।
ज्योतिषपीठ शंकराचार्य ने फाड़ी थी किताब
इसी तरह अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों को लेकर लगातार प्रदेश में राजनीति गरमाई हुई है। दरअसल दो दिनों पहले ही कबीरधाम जिले के ग्राम जुनवानी में भागवत कथा और यज्ञ कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा कक्षा 5 के बच्चों के लिए तैयार की किताब में पाठ 25 के चमत्कार नाम के पाठ में साधु के वेश में ठग को लेकर लिखी गई बातों का विरोध करते हुए भरी सभा में मंच में उस किताब के पन्ने को फाड़ दिया था। साथ ही उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही थी।
छोटे बच्चों के मन में साधुओं के लिए भरी जा रही दुर्भावना
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पाठ्य पुस्तक से इस विषय को हटाने की मांग करते हूए कहा कि एक नियोजित तरीके से छोटे बच्चों के मन में साधुओं के प्रति दुर्भावना भरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठग साधु स्वामी वेश में ही नहीं कई रूप में आते हैं। किसी भी कपड़े में ठगी हो सकती है, फकीर के वेश में भी बहुत ठग हैं, आतंकवादी घूम रहे हैं, उसके बारे में क्यों नहीं है। उन्होंने कहा था कि सबसे पहले इस पाठ को इस पाठ्य पुस्तक से अलग किया जाना चाहिए। जाकिर अली इसके लेखक हैं और जो इस पाठ को इस पाठ्य पुस्तक में शामिल कराने वाले हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
बयान के बाद शुरू हुई थी प्रदेश में राजनीति
इस बयान के बाद इन बातों को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जिसके बाद भाजपा ने इससे धर्म का अपमान बताते हुए प्रदेश सरकार को इसका दोषी ठहराया और इस तरह की बातें पुस्तकों में शामिल करने पर कांग्रेस को दोषी ठहराते हुए धर्म विरोधी बताया। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इस विषय को भाजपा कार्यकाल में शामिल किए जाने का आरोप लगाया।
सम्मेद शिखर पर जताई थी चिंता
इससे पहले भी अविमुक्तेश्वरानंद ने जोशीमठ और सम्मेद शिखर को लेकर चिंता जताते हुए बयान दिया कि जैन समाज अल्पसंख्यक होने के बाद भी श्री सम्मेद शिखर को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके संघर्ष का सम्मान होना चाहिए। हिंदू समाज को समझना चाहिए कि तीर्थ और पर्यटन अलग अलग स्थल है। जैन समाज लगातार पारसनाथ और सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाये जाने का विरोध कर रहा है।












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