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Justice Yashwant Varma: 'कैश एट होम' केस में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा के वो 5 अहम फैसले, रहा सुर्खियों में

Justice Yashwant Varma: दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े कथित नकदी बरामदगी के मामले में सुप्रिम कोर्ट ने जांच शुरू कर दी है। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति ने मंगलवार, 25 मार्च को जांच शुरू कर दी है।

जस्टिस यशवंत वर्मा पिछले लगभग 11 साल इलाहाबाद और दिल्ली हाई कोर्ट में जज के रूप में कार्यरत हैं। अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने कई ऐसे फैसले दिए जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था।

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Justice Yashwant Varma: जस्टिस वर्मा के अहम फैसले

दिल्ली उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश वर्मा के पांच बड़े फैसले के बारे में विस्तार से जानते हैं...

  • खारिज कर दी थी कांग्रेस की याचिका

13 फरवरी 2024 को इनकम टैक्स की ओर से कांग्रेस को 100 करोड़ से ज्यादा बकाया टैक्स की वसूली के लिए नोटिस भेजा था। इसे लेकर कांग्रेस पार्टी ने एक याचिका दायर की थी दावा किया की उसके बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं।

इसके खिलाफ वकील और कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल में एक याचिका लगाई जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद पार्टी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया इस मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस पुरूषेन्द्र कुमार कौरव की बेंच ने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकार रखा।

  • कफील खान पर अहम फैसला

अगस्त, 2017 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कथित तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई ना होने के कारण 60 बच्चों की मौत हो गई थी। मामले में डॉ. कफील खान पर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगा जिसमें वह 7 महीने तक जेल में रहे थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस वर्मा ने इस पर अहम फैसला सुनाते हुअ डॉ. खान को जमानत दी थी। उनके इस फैसले ने देश भर में चिकित्सीय जवाबदेही, सरकारी लापरवाही और मानवाधिकारों के मुद्दों पर ध्यान खींचा था।

  • ED की शक्तियां

जनवरी 2023 में जस्टिस वर्मा की सिंगल बेंच ने ईडी पर अहम फैसला सुनाया था। जस्टिस वर्मा ने ईडी के अधिकारों पर बात करते हुए कहा था कि, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा किसी दूसरे अपराध की जांच नहीं कर सकती है।

जांच एजेंसी खुद से यह नहीं मान सकती कि कोई अपराध किया गया है। जस्टिस वर्मा के इस फैसले को जांच एजेंसियों द्वारा अपनी शक्तियों के दुरुपयोग पर लगाम लगाने के तौर पर देखा गया।

  • दिल्ली आबकारी नीति मामले की मीडिया रिपोर्टिंग

2022 में दिल्ली में कथित तौर पर शराब घोटाले में जस्टिस वर्मा AAP नेता और शराब नीति मामले में अभियुक्त विजय नायर की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में नायर की ओर से कहा गया था कि न्यूज चैनलों ने जांच एजेंसियों की संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक डोमेन में लीक कर दी थी।

इसके बाद अदालत ने एनबीडीए को आदेश दिया था कि वह अपने सदस्य मीडिया कंपनियों को बुलाकर लीक हुई जानकारी के बारे में पूछताछ करें।

  • रेस्तरां बिल सर्विस चार्ज फैसला

जस्टिस वर्मा ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए)के उस दिशा-निर्देशों पर रोक लगा दी थी। जस्टिस यशवंत वर्मा नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया और एफएचआर की इन निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।

जस्टिस वर्मा ने आदेश दिया, "याचिकाकर्ता के सदस्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कीमत और टैक्स के अतिरिक्त जो भी सर्विस चार्ज लगाया जाए उसे ग्राहकों को प्रमुखता से दिखाया जाए।"

हालांकि, सितंबर 2023 में जस्टिस प्रतिभा सिंह ने इस आदेश को पलट दिया और "सर्विस चार्ज की जगह स्टाफ कॉन्ट्रिब्यूशन कर दिया। इसके साथ ही कहा कि ऐसा कॉन्ट्रिब्यूशन पूरे बिल के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है।

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