Delhi News: दिल्ली में इस बार क्यों है इतनी गर्मी?, नवंबर की शुरुआत में भी सर्दी नदारद
Delhi News: दिल्ली में नवंबर के पहले हफ्ते में भी ठंड का असर महसूस नहीं हुआ है और अधिकतम तापमान औसतन 28 डिग्री सेल्सियस पर बना हुआ है। बीते 74 वर्षों में अक्टूबर का महीना सबसे गर्म रहा है। गर्मी का सिलसिला नवंबर में भी बरकरार रहा है। आमतौर पर इस महीने तक तापमान में गिरावट शुरू हो जाती थी। लेकिन इस बार नवंबर के अंत तक तापमान में खास कमी की संभावना नहीं दिख रही है। जिससे दिल्लीवासियों को ठंडी हवा का इंतजार और लंबा हो सकता है।
पश्चिमी विक्षोभ की कमी ने बढ़ाई गर्मी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अप्रत्याशित गर्मी का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ की कमी है। ये विक्षोभ भूमध्य सागर से उठकर उत्तर भारत में ठंडी और गीली हवा लेकर आते हैं। जिससे तापमान में गिरावट होती है। लेकिन अक्टूबर में मानसून के जाने के बाद से दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में यह प्रभाव न के बराबर रहा है। इसके कारण इस क्षेत्र में बारिश भी सामान्य से लगभग 80 प्रतिशत कम हुई है। जिससे मौसम शुष्क और गर्म बना हुआ है।

एल नीनो और ला नीना के प्रभाव
मौसम विज्ञानियों के अनुसार वैश्विक जलवायु घटनाएं जैसे एल नीनो और ला नीना भी इस देरी में योगदान दे रही हैं। जहां एल नीनो उच्च तापमान का कारक है। वहीं इसकी तीव्रता में कमी नहीं आई है। दूसरी ओर ला नीना जो आम तौर पर ठंडी जलवायु लाता है। इसके प्रभाव का नवंबर-दिसंबर में आने की संभावना है। लेकिन इसका समय और प्रभाव अभी भी अनिश्चित है।
आने वाले हफ्तों में सर्दी का अनुमान नहीं
भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि ठंडे मौसम के आगमन में अभी और देरी हो सकती है। IMD का अनुमान है कि 16 से 21 नवंबर के बीच एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित करेगा। लेकिन यह मुख्यतः ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों तक ही सीमित रहेगा। इस प्रकार दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में तापमान में कोई उल्लेखनीय गिरावट या बारिश की उम्मीद नहीं है।
असामान्य मौसम पैटर्न का नया संकेत
दिल्ली में इस तरह के मौसम के साथ बदलते वैश्विक पैटर्न का संकेत है कि राजधानी को नए मौसमी लय के अनुसार ढलना होगा। फिलहाल दिल्लीवासी एक विस्तारित शरद ऋतु का अनुभव कर रहे हैं और सर्दी के ठंडे तापमान के इंतजार में हैं। एल नीनो के प्रभाव की दृढ़ता और ला नीना के संभावित विकास ने पूर्वानुमानों को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। जिससे इस वर्ष सर्दी के आगमन में अधिक देरी होने की संभावना है।












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