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निर्भया के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने वाले पवन जल्लाद को जानिए कितने रुपए मिले

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दिल्ली। 16 दिसंबर, 2012 को देश की राजधानी दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले ने देश को हिलाकर रख दिया था। कई साल तक चली लड़ाई के बाद आज निर्भया को इंसाफ मिल गया। तिहाड़ जेल के फांसी घर में शुक्रवार सुबह ठीक 5:30 बजे निर्भया के दोषियों को फांसी दी गई। निर्भया के चारों दोषियों मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया गया।

पवन जल्लाद को मिले 60 हजार रुपए

पवन जल्लाद को मिले 60 हजार रुपए

निर्भया के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से पवन जल्लाद को बुलाया गया था। पवन जल्लाद ने चारों दोषियों को 20 मार्च को फांसी पर लटकाया। इसके लिए तिहाड़ जेल प्रशासन ने पवन जल्लाद को 60 हजार रुपए दिए। जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति को फांसी पर लटकाने की फीस 15 हजार हैं। वहीं 4 दोषियों को फांसी पर लटकाने के हिसाब से पवन जल्लाद को तिहाड़ जेल प्रशासन ने 60 हजार रुपए दिए।

दो बार बिना फांसी दिए ही लौटना पड़ा था

दो बार बिना फांसी दिए ही लौटना पड़ा था

इससे पहले तिहाड़ जेल प्रशासन की टीम पवन जल्लाद को बुधवार को ही अपनी निगरानी में मेरठ से दिल्ली लेकर गई थी। डेथ वारंट के मुताबिक 20 मार्च को सुबह निर्भया कांड के चारों दोषियों को फांसी देने की तारीख तय की गई थी। इन दोषियों को फांसी देने के लिए इससे पहले भी पवन जल्लाद दो बार तिहाड़ पहुंचा था, लेकिन ये शातिर अपराधी कानूनी दांव-पेंच आजमा कर फांसी की सजा आगे बढ़वाते रहे। पिछली दोनों बार फांसी की सजा टलने से उसे बिना फांसी दिए ही वापस लौटना पड़ा था।

 दादा ने दी थी एक साथ दो दोषियों को फांसी

दादा ने दी थी एक साथ दो दोषियों को फांसी

पवन जल्लाद के दादा कालूराम भी एक जल्‍लाद थे और अब पवन ने अपने ही दादा का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कालूराम ने एकसाथ दो दोषियों को फांसी दी थी जबकि पवन ने आज एक साथ चार दोषियों को फांसी पर लटकाया है। पवन ऐसे परिवार का सदस्य है जिसकी चार पीढ़ियां फांसी देती आ रही हैं। पवन के परदादा लक्ष्मणराम अपने परिवार में जल्लाद का काम करने वाले पहले शख्स थे। तब देश में अंग्रेजी हुकूमत थी।

परदादा ने इंदिरा गांधी के हत्‍यारों को चढ़ाया फांसी पर

परदादा ने इंदिरा गांधी के हत्‍यारों को चढ़ाया फांसी पर

दिल्ली के जीसस मेरी कॉलेज की स्टूडेंट्स गीता चोपड़ा व उनके भाई संजय चोपड़ा की हत्या करने वाले कुख्यात अपराधी रंगा-बिल्ला को लक्ष्मणराम के बेटे कालूराम ने फांसी पर लटकाया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और षड़यंत्र रचने वाले केहर सिंह को भी कालूराम ने फांसी पर चढ़ाया था। कालूराम ने बाद में यह काम बेटे मम्मू सिंह को सौंप दिया। मम्मू ने आखिरी बार साल-1997 में जबलपुर के कांताप्रसाद तिवारी को फांसी दी थी।

अपने काम पर पवन को गर्व

अपने काम पर पवन को गर्व

पवन ने अपने दादा-परदादा से फांसी देने की टेक्निक समझी। फांसी देने के पहले कई बार रिहर्सल किया जाता है ताकि इसमें कोई चूक ना हो। पवन कहते हैं, बहुत लोगों के लिए जल्लाद एक गाली है लेकिन उनको अपने काम पर गर्व है। चारों दोषियों को फांसी देने के बाद उनके शवों को दीनदयाल उपाध्‍याय अस्‍पताल ले जाया गया। यहां पर मेडिकल ऑफिसर ने चारों दोषियों को मृत घोषित कर दिया था। शवों का पोस्‍टमॉर्टम भी एक प्रक्रिया के तहत हुआ और बताया जा रहा है कि पोस्‍टमॉर्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।

जेल डॉक्टर ने मृत घोषित किए निर्भया के चारों दोषी, अब इसके बाद आगे क्या होगा?

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English summary
tihar jail administration pay 60 thousand to pawan jallad in nirbhaya case by hanging 4 convicts
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