सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बेघर लोगों के लिए आश्रय व्यवस्था की मांगी जानकारी, DUSIB को देना होगा ब्यौरा

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड से राजधानी में बेघर व्यक्तियों के लिए उपलब्ध आश्रय सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है। सर्दियों के आगमन के साथ ही यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने सर्दी के मौसम में बेघर व्यक्तियों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने DUSIB से मौजूदा आश्रय गृहों में रह रहे व्यक्तियों की संख्या और वास्तविक मांग का अनुमान लगाने को कहा।

supreme court

आश्रय क्षमता और कमी पर चर्चा

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने न्यायालय को सूचित किया कि दिल्ली में वर्तमान में आश्रय गृहों की कुल क्षमता लगभग 17,000 व्यक्तियों की है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि नौ आश्रय गृहों को ध्वस्त कर दिया गया। जिससे 450 निवासियों पर असर पड़ा। जबकि उनकी आधिकारिक क्षमता 286 थी।

खंडपीठ ने DUSIB के वकील से आश्रय गृहों की मौजूदा स्थिति और बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी मांगी। वकील ने बताया कि वर्तमान मामला केवल छह अस्थायी आश्रयों से संबंधित है। जो हालिया बाढ़ के कारण प्रभावित हुए थे।

बाढ़ से हुई क्षति

DUSIB के वकील ने अदालत को सूचित किया कि 2023 में यमुना नदी में आई बाढ़ के कारण छह अस्थायी आश्रय नष्ट हो गए। जून 2023 से ये आश्रय निर्जन हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन क्षेत्रों के बेघर व्यक्तियों को गीता कॉलोनी स्थित स्थायी आश्रय गृहों में स्थानांतरित करने की कोई आपत्ति नहीं होगी।

पिछले आंकड़ों का हवाला

DUSIB ने अदालत को यह भी बताया कि पिछले शीतकालीन मौसम में दिल्ली में ठंड के कारण कोई मौत दर्ज नहीं की गई। खंडपीठ ने DUSIB को निर्देश दिया कि वे बेघर व्यक्तियों के लिए उपलब्ध सभी सुविधाओं और उनकी पर्याप्तता का विवरण प्रस्तुत करें।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले पांच से छह वर्षों के प्रामाणिक आंकड़ों का उपयोग करते हुए बेघर व्यक्तियों की वास्तविक मांग और आपूर्ति का आकलन करने को कहा है।

दुर्व्यवहार के आरोपों पर चिंता

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने DUSIB के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों का मुद्दा उठाया। खंडपीठ ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना प्रमाण के लगाए गए आरोप चरित्र हनन के समान हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को निराधार आरोपों से नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

आगे की कार्रवाई और सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने DUSIB को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि दिल्ली में बेघर व्यक्तियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। इस संबंध में विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया यह कदम राजधानी में बेघर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और उनके लिए सुरक्षित आश्रय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले दिनों में न्यायालय का निर्णय इस मुद्दे को हल करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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