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Judge Cash Case: 2018 चीनी मिल बैंक घोटाले में भी जुड़ा था जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम! CBI की FIR में थे शामिल

Judge Cash Case: दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। 14 मार्च की रात उनके लुटियंस दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में आग लगने की खबर आई, लेकिन जब दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे, तो मामला कुछ और ही निकला। जले हुए बोरों के बीच 15 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने का दावा किया गया।

इस घटना ने न्यायपालिका और सरकार में हलचल मचा दी। न्यायमूर्ति वर्मा पहले भी 2018 के सिंभौली शुगर मिल बैंक घोटाले में CBI जांच के दायरे में आ चुके थे। अब जब उनके घर से इतनी बड़ी रकम मिली है, तो सवाल उठने लगे हैं-क्या यह पुराना बैंक घोटाले से जुड़ा मामला है? क्या किसी बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होने वाला है?

Judge Cash Case

इस पूरे मामले की सरकार और न्यायपालिका स्तर पर जांच शुरू हो गई है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है। लेकिन क्या सिर्फ ट्रांसफर से यह मामला खत्म हो जाएगा, या आगे कोई सख्त कार्रवाई होगी? आइए, इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं...
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2018 में बैंक घोटाले के मामले में नाम आया था सामने

2018 में सिंभौली शुगर मिल बैंक घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें यशवंत वर्मा का नाम भी शामिल था। उस समय वह कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक थे।

ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 2012 में हापुड़ शाखा से किसानों के लिए 148.59 करोड़ रुपये का लोन जारी किया गया था। यह पैसा किसानों को खाद और बीज खरीदने के लिए दिया गया था, लेकिन सिंभौली शुगर मिल ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए इस लोन को हड़प लिया।

बैंक के अनुसार, 2015 तक यह लोन डूबत खाते में चला गया, जिसमें 97.85 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और 109.08 करोड़ रुपये की बकाया राशि बनी रही।

न्यायपालिका की सख्त टिप्पणी और नई जांच

2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सात बैंकों से जुड़े इस घोटाले की फिर से जांच करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्यायपालिका की आत्मा को झकझोरने वाला है।

इसके बाद CBI ने फरवरी 2024 में नई जांच शुरू की। सवाल उठाया गया कि आखिर 2009 से 2017 तक इस कंपनी को बैंक लोन क्यों देते रहे, जबकि यह पहले से डिफॉल्टर थी। मार्च 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति वर्मा के घर आग और कैश बरामदगी

14 मार्च की रात न्यायमूर्ति वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में आग लग गई। दमकल विभाग को रात 11:43 बजे सूचना मिली। जब दमकलकर्मी पहुंचे, तो उन्होंने जले हुए बोरों के बीच भारी मात्रा में कैश पड़ा पाया। एक स्टाफ मेंबर ने दावा किया कि जले हुए सामान में कोर्ट से जुड़े दस्तावेज और स्टेशनरी शामिल थे।

हालांकि, इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई क्योंकि कोई घायल नहीं हुआ था। लेकिन इस घटना के वीडियो सीनियर पुलिस अधिकारियों और सरकार तक पहुंच गए, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने जांच के आदेश दिए।

न्यायपालिका में हलचल, ट्रांसफर की तैयारी

इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने का फैसला किया। लेकिन यह पहला कदम बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ न्यायाधीश कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अगर न्यायमूर्ति वर्मा ने इस्तीफा नहीं दिया, तो संसद के जरिए उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
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