जामा मस्जिद में महिलाओं के अकेले आने पर प्रतिबंध के फैसले की स्वाति मालीवाल ने की इरान से तुलना, भेजा नोटिस
Jama Masjid ban entry of women: जामा मस्जिद में जिस तरह से नया फरमान जारी किया गया है कि महिला किसी पुरुष के साथ ही यहां आ सकती हैं, उसके बाद से जामा मस्जिद के इस फैसले पर विवाद हो रहा है। जामा मस्जिद पर अकेले महिलाओं के आने पर लगे प्रतिबंध पर स्वाति मालीवाल ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने जामा मस्जिद के इस फैसले की तुलना इरान से कर डाली है। स्वाति मालीवाल ने कहा जामा मस्जिद में महिलाओं की एंट्री को रोकने का फैसला बिल्कुल गलत है। जितना हक एक पुरुष को इबादत का है, उतना ही एक महिला को भी है। मैं जामा मस्जिद इमाम को नोटिस जारी कर रही हूं। इस तरह महिलाओँ की एंट्री बैन करने का अधिकार किसी को नहीं है।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने जामा मस्जिद को इस बाबत नोटिस जारी किया है। वहीं जामा मस्जिद प्रशासन ने इस फैसले का बचाव किया है। मस्जिद के प्रवक्ता सबीउल्लाह खान ने सफाई देते हुए कहा कि यह प्रतिबंध उन महिलाओं पर नहीं है जो अपने परिवार या पति के साथ आती है हैं। यह फैसला मस्जिद परिसर में गलत हरकतों को रोकने के लिए लिया गया है। महिलाओं पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। परिवार के साथ आने और शादीशुदा जोड़ों के आने पर कोई बैन नहीं है।
मस्जिद के प्रवक्ता ने कहा कि जो लड़कियां यहां अकेले आती हैं वह यहां लड़कों को मिलने का टाइम देती हैं, यहां गलत हरकतें होती है, लड़कियां मस्जिद के भीतर डांस करती हैं, टिकटॉक वीडियो बनाती हैं। इन हरकतों के चलते मस्जिद में लड़कियों को अकेले आने पर रोक लगाई गई है। अगर यहां कोई इबादत करने के लिए आना चाहता है तो वह आ सकता है। लेकिन लोगों को यह समझना चाहिए कि यह धार्मिक स्थल है, कोई पार्क नहीं है।












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