Delhi: प्रदूषण को लेकर बोले पर्यावरण मंत्री गोपाल राय, कहा-'केंद्र सरकार ने कोई योजना नहीं बनाई'
Pollution Crisis In Delhi: राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इस मौसम में पहली बार दिल्ली की वायु गुणवत्ता सीवियर प्लस श्रेणी में दर्ज की गई है। जिसने पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस स्थिति के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण की ओर रुख करने का निर्देश दिया है।
दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेप-4 प्रतिबंधों (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के धीमे क्रियान्वयन पर दिल्ली सरकार की आलोचना की। न्यायालय ने प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है।

इस आदेश के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या दिल्ली सरकार कामकाज के लिए वर्क फ्रॉम होम और ट्रैफिक में कमी के लिए ऑड-ईवन जैसे उपायों को फिर से लागू करेगी।
एलजी ने दिए कार्यालयों का समय बदलने के निर्देश
सर्दियों के महीनों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण के स्तर को देखते हुए और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तहत एलजी वीके सक्सेना ने 28 फरवरी तक अलग-अलग कार्यालय समय के कार्यान्वयन का निर्देश दिया है। एलजी का यह आदेश दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों सहित दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू होगा।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय का बयान
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने प्रेस वार्ता में राजधानी और उत्तर भारत में व्याप्त इस भयंकर प्रदूषण संकट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज पूरा उत्तर भारत गंभीर प्रदूषण की चपेट में है। बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और बच्चों के स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं। यह स्थिति लोगों के जीवन पर गहरा असर डाल रही है।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने केंद्र सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण जानलेवा हो गया है। लेकिन केंद्र सरकार इस गंभीर स्थिति में भी निष्क्रिय बनी हुई है। उन्होंने दिल्ली में बीएस-4 वाहनों के संचालन और पड़ोसी राज्यों से पराली जलाने को भी प्रदूषण का अहम कारण बताया।
GRAP-4 लागू, सख्त निगरानी
प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दिल्ली सरकार ने ग्रेप-4 प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने की घोषणा की है। मंत्री गोपाल राय ने केंद्र सरकार से इस पर्यावरणीय आपातकाल से निपटने के लिए तुरंत बैठक बुलाने की अपील की।
ऑड-ईवन और वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों पर राय ने कहा कि इन पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मौजूदा हालात के आकलन के आधार पर लिया जाएगा।
कृत्रिम वर्षा को लेकर असमंजस की स्थिति
प्रदूषण नियंत्रण के लिए कृत्रिम वर्षा का प्रस्ताव भी चर्चा में है। लेकिन राय ने इसके क्रियान्वयन पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए ठोस कार्य योजना और केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी है। जो अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति ने जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला है। सुप्रीम कोर्ट और सरकार द्वारा उठाए गए कदम संकट को कम करने की दिशा में एक प्रयास हैं। हालांकि इस पर्यावरणीय आपातकाल से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग और अभिनव समाधानों की जरूरत है।
वायु प्रदूषण की यह स्थिति राजधानी और पूरे उत्तर भारत के लिए एक चेतावनी है। सरकार और न्यायपालिका के संयुक्त प्रयासों से ही इस संकट पर काबू पाया जा सकता है। फिलहाल दिल्ली स्कूल बंद होने, ऑनलाइन शिक्षा और कठोर प्रदूषण नियंत्रण उपायों के साथ एक अहम मोड़ पर खड़ी है।












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