Delhi School Fee Hike: क्या इस साल बढ़ेगी आपके बच्चे के स्कूल की फीस? सरकार के इस फैसले ने बदल दी पूरी तस्वीर
Delhi School Fee Hike: दिल्ली के लाखों अभिभावकों के लिए निजी स्कूलों की फीस को लेकर चल रही लंबी खींचतान के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। दिल्ली सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रित करने वाला नया रेगुलेशन कानून अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा। पहले इसे 2025-26 से लागू करने की योजना थी, लेकिन कानूनी बारीकियों और सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के बाद सरकार ने इसे एक साल के लिए टालने का निर्णय लिया है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने अपनी इस नई समयसीमा की जानकारी साझा की। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस बदलाव के बावजूद, मौजूदा सत्र 2025-26 में स्कूलों को मनमानी फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी, जिससे पैरेंट्स की जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ फिलहाल टल गया है।

Delhi School: 2025-26 सत्र में पुरानी फीस पर ही चलेगा काम
सरकार ने नोटिफिकेशन के जरिए साफ कर दिया है कि इस साल किसी भी प्राइवेट स्कूल को फीस में वृद्धि करने की इजाजत नहीं है।
- स्कूल केवल वही फीस ले सकेंगे जो 1 अप्रैल 2025 तक लागू थी।
- यदि किसी स्कूल ने इस बीच फीस बढ़ा दी है, तो उसकी कड़ी जांच की जाएगी।
- अदालती फैसलों के आधार पर बढ़ी हुई राशि अभिभावकों को लौटानी या भविष्य की फीस में एडजस्ट करनी पड़ सकती है।
ये भी पढ़ें: CBSE Board Admit Card 2026: आ गए 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के एडमिट कार्ड, कैसे और कहां से करें डाउनलोड?
Delhi School Fees: सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बदला फैसला
पिछले महीने कई निजी स्कूलों ने इस कानून को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थीं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि दिल्ली में कई स्कूलों की फीस पहले से ही बहुत ज्यादा है, लेकिन कानून को लागू करने में जल्दबाजी न दिखाई जाए। इसी सलाह को मानते हुए सरकार ने कानून की समयसीमा को आगे बढ़ाया है ताकि कार्यान्वयन सुचारू रूप से हो सके।
SLFRC: स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी का गठन
नए कानून के तहत हर स्कूल में एक स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने इसके लिए एक सख्त टाइमलाइन जारी की है:
10 दिन के भीतर: हर प्राइवेट स्कूल को अनिवार्य रूप से SLFRC का गठन करना होगा।
14 दिन के भीतर: कमेटी बनने के बाद स्कूल को अगले तीन सत्रों (2026-27 से 2028-29) के लिए प्रस्तावित फीस का विवरण देना होगा।
30 दिन के भीतर: जिला स्तर पर 'अपील कमेटी' बनाई जाएगी, जहां माता-पिता अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।
फीस साइकिल और पारदर्शिता के नए नियम
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि फीस साइकिल (3 साल) के बीच में कोई भी स्कूल अचानक रकम नहीं बढ़ा सकेगा। जब तक नई फीस तय नहीं हो जाती, स्कूल पुरानी दर से ही पैसे लेंगे। यदि कोई अतिरिक्त राशि ली जाती है, तो उसे बाद में तय की गई फीस में समायोजित (Adjust) करना अनिवार्य होगा।
शिक्षा मंत्री और अभिभावकों का पक्ष
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस कदम को अभिभावकों की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि "हमारा मकसद स्कूलों की मनमानी रोकना और फीस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।" वहीं, पैरेंट्स एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है ताकि कोई भी स्कूल नए नियमों की आड़ में दबाव न बना सके।
इस पूरे बदलाव का सार यही है कि फिलहाल दिल्ली के अभिभावकों के लिए 'स्टेटस क्यू' (यथास्थिति) बरकरार है और फीस में किसी भी बड़े उछाल से उन्हें फिलहाल सुरक्षा मिल गई है।
ये भी पढ़ें: Delhi Budget 2026: सरकार ने RRTS पर लुटाए 2200 करोड़, क्या खत्म होगी दिल्ली-NCR की ट्रैफिक और प्रदूषण टेंशन?












Click it and Unblock the Notifications