Delhi Weather: दिल्ली में मौसम हुआ सुहाना, रिमझिम बारिश ने दिलाई गर्मी से राहत; आपके शहर में कैसा रहेगा वेदर?
Delhi NCR Rain Today: दिल्ली और एनसीआर वालों के लिए बड़ी राहत मिली है! हफ्तों से झुलसाने वाली और उमस भरी गर्मी का दौर अब थम चुका है। आज सुबह 10 बजे के बाद अचानक मौसम ने करवट ली और हल्की बारिश ने मौसम को सुहाना बना दिया।
IMD ने आज और कल (30 सितंबर और 1 अक्टूबर) हल्की बारिश होने की संभावना जताई, जिससे तापमान में गिरावट देखने को मिली है। पिछले दो दिनों से आसमान में छाए बादलों ने सूरज की सीधी तपिश को कुछ हद तक कम किया था, लेकिन अब घने बादल छाए हुए हैं, जिससे मौसम खुशनुमा होने की उम्मीद बढ़ गई है।

दिल्ली-एनसीआर में यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि सितंबर का महीना इस बार काफी गर्म रहा है। रविवार को दिल्ली में 38.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया था, जो दो साल में सितंबर का सबसे अधिक तापमान था।
इसी तरह, सोमवार को न्यूनतम तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री ऊपर 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था, जिसने रात में भी लोगों को चैन नहीं लेने दिया। 57% से 76% के बीच रही आर्द्रता (Humidity) ने इस बेचैनी को और बढ़ा दिया था।
मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद समेत पूरे एनसीआर में हल्की बूंदाबांदी हो रही है। मंगलवार को तापमान 25°C से 35°C के बीच रहने का अनुमान है, जिससे लोगों को लंबे समय बाद भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।
भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) अपने अंतिम चरण में एक मजबूत नोट पर समाप्त होने की ओर अग्रसर है। 29 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में 935.2 मिलीमीटर (mm) बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक है।
IMD के डेटा से पता चलता है कि 2019 के बाद से लगातार यह सातवां साल है जब देश में मॉनसून सीज़न की बारिश या तो 'सामान्य' श्रेणी में रही है या 'सामान्य से ऊपर' की श्रेणी में रही है। आधिकारिक तौर पर जून से सितंबर तक चलने वाले मुख्य वर्षा ऋतु में देश को औसतन 880 मिमी बारिश प्राप्त होती है।
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत पर मॉनसून की सबसे ज्यादा मेहरबानी
इस बार मॉनसून की सबसे ज्यादा मेहरबानी उत्तर-पश्चिम (Northwest) और मध्य भारत (Central India) के क्षेत्रों पर रही। उत्तर-पश्चिम भारत ने लगातार चारों महीने सरप्लस बारिश दर्ज की, जहां संचयी वर्षा (cumulative rainfall) 746.4 मिमी रही, जो सामान्य से 27.3 प्रतिशत अधिक है। वहीं, मध्य भारत में भी इस सीज़न की कुल वर्षा 1122.8 मिमी दर्ज हुई, जो सामान्य से 15.2 प्रतिशत अधिक है।
पूर्वोत्तर भारत में दिखा बारिश का भारी घाटा
जहां देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, वहीं आमतौर पर अधिक वर्षा प्राप्त करने वाले पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के क्षेत्रों में इस बार बारिश की भारी कमी दर्ज की गई। 29 सितंबर तक इस क्षेत्र में 1089.3 मिमी* बारिश हुई, जो सामान्य से 20 प्रतिशत कम है। सबसे अधिक घाटे वाले राज्यों में अरुणाचल प्रदेश (-41 प्रतिशत), असम (-33 प्रतिशत), मेघालय (-42 प्रतिशत) और बिहार (-31 प्रतिशत) शामिल थे।
IMD अधिकारियों ने पहले भी बताया था कि जलवायु विज्ञान के अनुसार, जब भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होती है, तो पूर्वोत्तर भारत में अक्सर सामान्य से कम बारिश देखने को मिलती है। हालांकि, इस सीज़न में लद्दाख (+342 प्रतिशत), राजस्थान (+63 प्रतिशत), और पंजाब (+42 प्रतिशत) जैसे कम वर्षा प्राप्त करने वाले क्षेत्रों में रिकॉर्डतोड़ बारिश दर्ज की गई।












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