दिल्ली में होगी ट्रिपल इंजन की सरकार! आम आदमी पार्टी ने मेयर चुनाव से क्यों पीछे खींचे अपने कदम?
Delhi Mayor: दिल्ली की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जिस आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) में तीन साल तक लगातार मेयर की कुर्सी संभाली, उसने इस बार मेयर चुनाव से हटने का एलान कर सबको चौंका दिया। आमतौर पर सत्ता में रहने वाली पार्टियां मेयर जैसे अहम पद के लिए जोर लगाती हैं, लेकिन AAP ने एक अलग ही रास्ता चुना है।
पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मंत्री आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया कि इस बार उनकी पार्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं लड़ेगी। इसके पीछे उन्होंने जो वजह बताई, वो दिल्ली की राजनीति में नए बहस के दरवाजे खोल रही है।

#WATCH | AAP Delhi President Saurabh Bharadwaj says, "We have decided that we will not field an Aam Aadmi Party candidate in the Mayor's elections this time. BJP should elect its own Mayor, BJP should form its own standing committee and should rule Delhi without any excuses..." pic.twitter.com/vYOLNnm8UQ
— ANI (@ANI) April 21, 2025
बीजेपी पर गंभीर आरोप
आतिशी ने कहा कि बीजेपी पिछले ढाई सालों से AAP के पार्षदों को तोड़ने में लगी है। उन्होंने कहा, "हम किसी को खरीदते या बेचते नहीं हैं। बीजेपी ने MCD में बहुमत पाने के लिए हमारे पार्षदों को तोड़ा है, लेकिन हम ऐसी राजनीति नहीं करते।"
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AAP ने छोड़ा चुनाव मैदान
आतिशी ने साफ कहा कि आम आदमी पार्टी मेयर का चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने कहा, "अब MCD में बीजेपी की बहुमत है, वे अपनी ट्रिपल इंजन की सरकार चलाएं। हम एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएंगे, लेकिन तोड़फोड़ की राजनीति में हिस्सा नहीं लेंगे।"
सौरभ भारद्वाज की भी प्रतिक्रिया
AAP के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा, "अब हमारे पास बहुमत नहीं है। 2022 में था, लेकिन अब नहीं है। हम राजनीति में खरीद-फरोख्त नहीं करते, इसलिए चुनाव नहीं लड़ रहे।" उन्होंने कहा कि अब दिल्ली की जिम्मेदारी पूरी तरह बीजेपी की है - चाहे सफाई हो, ट्रैफिक हो या प्रदूषण।
सौरभ भारद्वाज ने कहा, "जिस दिन से दिल्ली में MCD चुनाव तय हुए हैं, उसी दिन से सत्ता हथियाने की भाजपा की बेचैनी सबके सामने दिख रही है, चाहे वो चुनाव टालकर एकीकरण करना हो, या परिसीमन के नाम पर भाजपा के लिए छोटे-छोटे वार्ड बनाना हो या फिर लगातार भ्रष्ट तरीकों का इस्तेमाल करके मेयर और स्थायी समिति के चुनाव जीतने की कोशिश करना हो... अब उनके (भाजपा के) पास केंद्र है, उनके पास एलजी हैं, उनके पास दिल्ली सरकार है, और उनके पास एमसीडी भी होगी, इसलिए अब उन्हें दिल्ली की जनता के सामने कोई बहाना नहीं बनाना चाहिए और उन्हें दिखाना चाहिए कि दिल्ली में पूरा प्रशासन कैसे चलाया जाता है..."
#WATCH | AAP Delhi President Saurabh Bharadwaj says, "From the day the MCD elections were scheduled in Delhi, the desperation of the BJP to grab power is visible to everyone, whether it is unification by postponing the elections, or carving out small wards for the BJP in the name… https://t.co/cMcbYmYt7A pic.twitter.com/v4uv5JP2OV
— ANI (@ANI) April 21, 2025
BJP का पलटवार
AAP के इस फैसले पर बीजेपी ने हमला बोला है। दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि AAP को पता है कि वह बहुमत खो चुकी है। इसलिए अब वह त्याग की बात कर रही है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि आगे चलकर AAP और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो सकता है। बता दें, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने एमसीडी वार्षिक चुनाव के लिए सरदार राजा इकबाल सिंह को मेयर उम्मीदवार और जय भगवान यादव को डिप्टी मेयर उम्मीदवार घोषित किया है।
नामांकन के आखिरी दिन आया फैसला
21 अप्रैल को नामांकन का आखिरी दिन था और इसी दिन आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पीछे हटने का एलान कर दिया। अब 25 अप्रैल को होने वाले मेयर चुनाव में AAP मैदान में नहीं होगी।
तीन सालों तक रही AAP की मेयर
पिछले तीन सालों से दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की सरकार रही है। पहले दो सालों तक शैली ओबेरॉय और अली मोहम्मद इकबाल मेयर और डिप्टी मेयर रहे। इस साल रिजर्वेशन की वजह से महेश कुमार खींची मेयर बने।
BJP का पलड़ा भारी
दिल्ली में मेयर चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने मुकाबले से हटकर बीजेपी को बिना लड़े जीतने का मौका दे दिया। हालांकि अगर वोटिंग की नौबत भी आती, तो भी आंकड़े बीजेपी के पक्ष में ही जाते। फिलहाल नगर निगम सदन में कुल सदस्यों की संख्या 238 है। अगर इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के साथ-साथ नामित विधायकों को भी जोड़ लें, तो यह संख्या बढ़कर 262 हो जाती है।
ऐसे में मेयर पद जीतने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 132 वोटों की जरूरत थी। बीजेपी के पास 117 पार्षद, सात लोकसभा सांसद और 11 नामित विधायक हैं, जिनके समर्थन से बीजेपी के पास कुल 135 वोट बनते हैं, जो बहुमत के आंकड़े से तीन ज्यादा है और जीत को तय करता है।
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