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Delhi MCD की स्थायी समिति के सदस्यों के री-इलेक्शन पर रोक, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बार फिर से होने वाले नगर निगम की स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव पर रोक लगा दी है।

Delhi High Court

दिल्ली नगर निगम (Delhi MCD) की स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव फिर से 27 फरवरी को होना था। लेकिन शनिवार को मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने इस पर रोक लगा दी है। एमसीडी की स्थायी समिति के चुनाव के दौरान एक वोट को अवैध घोषित करने के मेयर शैली ओबेरॉय के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। ये याचिका भाजपा की दो पार्षद शिखा रॉय और कमलजीत सहरावत ने लगाई गई थी।

दिल्ली एमसीडी मेयर शैली ओबेरॉय की ओर से नगर निगम की स्थायी समिति के सदस्यों का दोबारा चुनाव करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि जस्टिस ने कहा कि स्थायी सदस्यों का फिर से चुनाव मामले में सुनवाई की अगली तारीख रोका जाए। दरअसल, एमसीडी के स्थायी सदस्यों का चुनाव परिणाम घोषित किए बिना फिर से चुनाव कराने के फैसला लिया था। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पहले हुए चुनाव के नतीजे घोषित किए बिना मेयर की तरफ से दोबारा चुनाव की घोषणा करना, पहली नजर में नियमों का उल्लंघन प्रतीत होता है। बता दें कि एमसीडी में स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव 27 फरवरी, 2023 को होना था। मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने एलजी वीके सक्सेना, मेयर शैली ओबरॉय और एमसीडी को नोटिस भी जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने मतपत्रों को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट में अदालत की छुट्टी के दिन मामले पर विशेष सुनवाई की गई। हाईकोर्ट के जस्टिस गौरांग कांत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि मेयर 24 फरवरी को हुए पिछले वोटिंग का परिणाम घोषित किए बिना ही फिर से चुनाव कराने जा रही हैं, जो कि नियमों का उल्लंघन है। हाई कोर्ट कहा कि नियम कहीं भी यह नहीं दर्शाते हैं कि दिल्ली के मेयर के पास स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव को अमान्य घोषित करने का अधिकार है।

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    वहीं दिल्ली की मेयर शैली ओबेरॉय ने कहा कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम में कहा गया है कि पीठासीन अधिकारी को किसी भी वोट को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार है, लेकिन इस प्रक्रिया के होने से पहले, चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों ने एक शीट पर परिणाम तैयार किया था। उन्होंने कहा, "बाद में जब मैंने चेक किया तो मुझे एक वोट अवैध मिला। जब मैं उस वोट को अमान्य घोषित कर रहा था तो भाजपा पार्षदों ने हंगामा किया"।

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