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Delhi Election 2025: दिल्ली चुनाव में 1998 और 2013 के नतीजे देखकर क्यों खुश हो रहे होंगे केजरीवाल?

Delhi Election 2025: दिल्ली में 1993 के बाद से यह आठवां विधानसभा चुनाव है। इनमें से सिर्फ दो ही बार दिल्ली की जनता ने सत्ता परिवर्तन के लिए वोट डाला है। 1998 में जब बीजेपी की केंद्र और दिल्ली दोनों जगह सरकारें थी और 2013 में जब कांग्रेस इसी तरह से दोनों जगह सत्ता में थी।

पहली बार में शीला दीक्षित की अगुवाई में कांग्रेस ने बीजेपी का तख्ता पलट किया था। दूसरी बार त्रिशंकु जनादेश में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जरूर थी,लेकिन दूसरे नंबर पर रही आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस के समर्थन से अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में अपनी पहली सरकार बनाई थी।

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Delhi Election 2025: 1998 और 2013 की तरह दिल्ली सरकार के खिलाफ सतह पर जनाक्रोश का अभाव

अगर 1998 और 2013 के चुनावी माहौल को देखें तो इस बार वैसा कुछ भी नहीं नजर आ रहा है,जिससे लग रहा हो कि मौजूदा सरकार के खिलाफ राजधानी में बहुत ज्यादा जनाक्रोश हो। अगर ऐसा कोई अंडर करंट है भी तो कम से कम जमीन पर यह नजर तो नहीं आ रहा है। सत्ताधारी'आप'और उसके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल दोनों के लिए यह बहुत बड़ी खुशी की बात होगी।

Delhi Election 2025: 1998 में प्याज के आंसू रो दी थी बीजेपी की सरकार

1998 में बीजेपी ने एंटी-इंकंबेंसी से बचने के लिए चुनाव से कुछ ही महीने पहले दिवंगत नेता सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाया था। वह मदन लाल खुराना और साहिब सिंह वर्मा के बाद बीजेपी सरकार में तीसरी सीएम थीं। चुनाव अक्टूबर-नवंबर में ऐसे समय में हो रहे थे, जब लगभग हर साल आलू-प्याज की कीमतें बढ़ने लगती हैं। उस बार भी वही हुआ था और प्याज की कीमतें अप्रत्याशित रूप से बढ़ने लगीं। इसको लेकर जनता में भारी नाराजगी थी।

शीला दीक्षित की अगुवाई में कांग्रेस ने जनता की नब्ज को पकड़ लिया और प्याज की कीमतों को बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया। विरोधी दल के नेताओं ने प्याज की माला पहनकर बीजेपी सरकार के खिलाफ माहौल तैयार किया। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जनता पहले से ही त्रस्त थी है। कांग्रेस को जबरदस्त फायदा मिला। बीजेपी बुरी तरह हारी और सत्ता से ऐसे बेदखल हुई, जो फिर अभी तक वापसी नहीं हुई।

Delhi Election 2025: 2013 में कांग्रेस घोटालों के आरोपों में घिरी थी और निर्भया कांड ने दिल्ली को सड़कों पर उतार दिया था

2013 के चुनाव में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थीं और कांग्रेस केंद्र से लेकर दिल्ली तक भ्रष्टाचार और दर्जनों घोटालों की वजह से जनता की नजरों में गिर चुकी थी। सरकार के खिलाफ माहौल में निर्भया कांड ने आग में घी का काम किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के आंदोलन की अगुवाई कर रहे केजरीवाल को बड़ा मौका मिला और उन्होंने आम आदमी पार्टी बनाकर एक विकल्प दिया जो बाद में कांग्रेस के लिए आफत साबित हुई।

Delhi Election 2025: त्रिशंकु विधानसभा ने सेट कर दी केजरीवाल की सियासी किस्मत

बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी थी और उसे 1993 के बाद पहली बार जबरदस्त फायदा मिला, लेकिन वह जादुई आंकड़े के लिए जरूरी 36 सीटें तक पहुंचने में 4 विधायकों से पिछड़ गई। पार्टी को 70 में से 31 सीटें मिलीं और 1 सीट उसकी सहयोगी अकाली दल को मिली थी। बाद में 28 सीटों वाली आप को कांग्रेस के 8 विधायकों का समर्थन मिला और उसकी सरकार बन गई। हालांकि, 49 दिनों में ही आपसी खींचतान की वजह से गिर गई।

इसके बाद दो चुनाव हुए और दोनों में ही फ्री बिजली-पानी का केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली के मतदाताओं पर ऐसा चाशनी चढ़ाया, जो फिर वह एक अजेय पार्टी के तौर पर उभर आई। कांग्रेस का तो पूर तरह से सफाया कर दिया और बीजेपी को भी पूरी तरह से लाचार बनाकर रख दिया।

Delhi Election 2025: आप सरकार के खिलाफ जनता में जमीन पर नहीं नजर आ रही, 1998 और 2013 वाली नाराजगी

दिल्ली में आज आप सरकार भी 10 साल की एंटी-इंकंबेंसी का सामना कर रही है। उसपर भी भ्रष्टाचार के अनेक आरोप हैं। पार्टी के मुख्यमंत्री से लेकर बड़े-बड़े मंत्री महीनों जेल में गुजार चुके हैं। लेकिन, इनकी पार्टी ने दिल्ली के वोटरों को मुफ्त की रेवड़ियों का ऐसा चस्का लगाया है कि मतदाताओं का बहुत बड़ा वर्ग पूरी तरह से उनके साथ नजर आता है।

दिल्ली की जमीनी हालात को देखने पर पता चलता है कि आप सरकार और उनके नेताओं से जनता को लाखों शिकायतें हैं, लेकिन फिर भी मतदाताओं में नाराजगी का वह स्तर नहीं है, जिसने 1998 में और 2013 में सरकारें बदल दीं।

ऊपर से केजरीवाल और आप की ओर से रेवड़ियों की कमी नहीं होने दी गई है। मुफ्त इलाज देने का जो वादा किया है, उसमें गरीब-अमीर का भेद मिटा दिया गया है। हर दिन कुछ न कुछ नए-नए वादे सामने आ रहे हैं। वह लाइन सेट कर रहे हैं और बीजेपी और कांग्रेस उस हिसाब से अपनी रणनीति बदलने को मजबूर दिख रही है।

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