Delhi Chunav: सीएम आतिशी और एलजी के बीच टकराव, मंदिरों और बौद्ध संरचनाओं के विध्वंस आदेश के खिलाफ लिखा पत्र
Delhi Assembly Elections 2025: दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना के उस निर्देश को चुनौती दी है। जिसमें राजधानी में विभिन्न धार्मिक स्थलों को हटाने की योजना बनाई गई है। इन स्थलों में मंदिर और बौद्ध संरचनाएं शामिल हैं। इस विवादास्पद आदेश के खिलाफ मुख्यमंत्री ने एलजी को एक कड़ा पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने धार्मिक स्थलों को तोड़ने के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की आशंका
आतिशी ने स्पष्ट रूप से कहा कि धार्मिक इमारतों को नष्ट करना दिल्ली के लोगों की भावनाओं को आहत करेगा। उन्होंने इन संरचनाओं के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इन संरचनाओं को ध्वस्त करने से इन समुदायों की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। दिल्ली के लोगों की ओर से मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि इन मंदिरों और पूजा स्थलों में से किसी को भी न तोड़ा जाए।

मुख्यमंत्री ने इस फैसले को दिल्ली के सांस्कृतिक ताने-बाने के लिए हानिकारक बताते हुए इसे दिल्ली के बहु-धार्मिक समाज के लिए हानिकारक करार दिया।
ध्वस्तीकरण प्रक्रिया पर उठाए सवाल
आतिशी ने अपने पत्र में विध्वंस के फैसले से संबंधित प्रक्रिया में अनियमितताओं को उजागर किया। परंपरागत रूप से धार्मिक स्थलों के बारे में किसी भी प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री और गृह मंत्री की सहमति ली जाती थी। लेकिन इस बार एलजी ने प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए सीधे अपने कार्यालय के माध्यम से यह निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देकर इस जिम्मेदारी को निर्वाचित सरकार के दायरे से बाहर कर दिया गया। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई कि धार्मिक स्थलों की सूची एलजी कार्यालय के निर्देश पर तैयार की गई थी और उनकी मंजूरी से ही धार्मिक समिति ने इसे आगे बढ़ाया।
ध्वस्तीकरण के लिए चिह्नित स्थल
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में उन स्थानों की सूची साझा की है। जहां धार्मिक स्थलों को तोड़ने की योजना बनाई गई है। इसमें वेस्ट पटेल नगर, दिलशाद गार्डन, सुंदर नगरी, सीमा पुरी, गोकल पुरी और न्यू उस्मानपुर एमसीडी फ्लैट्स के पास स्थित मंदिर शामिल हैं। यह विध्वंस केवल इन स्थानों के आध्यात्मिक महत्व को ही नहीं बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत को भी खतरे में डालता है।
एलजी की प्रत्यक्ष भागीदारी पर सवाल
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों को हटाने का निर्णय धार्मिक समिति द्वारा लिया गया। लेकिन यह एलजी के निर्देश और मंजूरी पर आधारित था। इस आरोप ने धार्मिक समिति की स्वायत्तता और राजधानी में धार्मिक स्वतंत्रता के सवालों को जन्म दिया है।
विवाद का बढ़ता प्रभाव
यह मामला केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है। बल्कि यह धर्म, संस्कृति और विरासत के मुद्दों को भी उठाता है। मुख्यमंत्री ने एलजी से अपील की है कि वे इस विवादास्पद आदेश को वापस लें और दिल्ली के विविध धार्मिक परिदृश्य की रक्षा करें।
क्या कहती है जनता
मुख्यमंत्री की इस चुनौती ने दिल्ली के निवासियों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर नागरिक संगठनों और धार्मिक समूहों ने मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन किया है।
धार्मिक स्थलों के विध्वंस को लेकर मुख्यमंत्री आतिशी और एलजी वीके सक्सेना के बीच का यह टकराव एक गहरी बहस को जन्म दे रहा है। यह मामला न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। बल्कि दिल्ली की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता को भी उजागर करता है। एलजी के फैसले का क्या परिणाम होगा। यह अभी देखना बाकी है। लेकिन इस विवाद ने राजधानी में धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक सम्मान के महत्व को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।












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