Delhi Chunav: गुजरात पुलिस से सुरक्षा मिलने पर केजरीवाल ने चुनाव आयोग से पूछा सवाल, कहा-'ये क्या चल रहा है'
Delhi Assembly Elections 2025: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सुरक्षा व्यवस्था में पंजाब पुलिस की जगह गुजरात पुलिस की तैनाती ने कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव आयोग के निर्देशों पर यह बदलाव किया गया। लेकिन इसकी मंशा और प्रक्रियाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने X पर गुजरात पुलिस के आदेश साझा करते हुए चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गुजरात पुलिस का यह आदेश पढ़ें। चुनाव आयोग ने पंजाब पुलिस को दिल्ली से हटाकर गुजरात पुलिस को तैनात कर दिया है। क्या हो रहा है। उनके इस बयान ने देशभर में बहस छेड़ दी है।

सुरक्षा में बदलाव की पृष्ठभूमि
दिल्ली पुलिस के अनुसार आप के अरविंद केजरीवाल के लिए सुरक्षा व्यवस्था में पंजाब पुलिस के हथियारबंद जवानों की तैनाती येलो बुक में दिए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल के विपरीत थी। सूत्रों का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की होगी। न कि बाहरी बल की।
चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत पंजाब पुलिस को केजरीवाल की सुरक्षा से हटाकर गुजरात पुलिस को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। दिल्ली में 250 पुलिस कंपनियों की मांग की गई थी। जिनमें से 220 कंपनियों को तैनात किया गया। यह बल गश्त, अंतरराज्यीय सीमाओं की जांच और मतदान केंद्रों की सुरक्षा का काम कर रहा है।
गुजरात के गृह मंत्री का जवाब
गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने केजरीवाल की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के मानक प्रोटोकॉल के तहत विभिन्न राज्यों से पुलिस बल बुलाना एक सामान्य प्रक्रिया है। गुजरात का विशेष उल्लेख क्यों। उन्होंने यह भी बताया कि 11 जनवरी को गुजरात से एसआरपी की आठ कंपनियां दिल्ली भेजी गईं थी।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस बदलाव को लेकर भाजपा और आप के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने केजरीवाल पर आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग के सुरक्षा प्रोटोकॉल से परिचित होते हुए भी विवाद खड़ा कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने केजरीवाल पर दिल्ली चुनाव में हार के डर से जानबूझकर यह मुद्दा उछालने का आरोप लगाया।
येलो बुक के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार पंजाब पुलिस के 10-12 से अधिक हथियारबंद जवानों की तैनाती येलो बुक के सुरक्षा मानकों का उल्लंघन था। येलो बुक में स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि स्थानीय पुलिस बल ही क्षेत्रीय सुरक्षा का जिम्मा संभाले।
चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर चर्चा
चुनावों के दौरान चुनाव आयोग कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न राज्यों से पुलिस बल बुलाता है। गृह मंत्रालय के तहत यह व्यवस्था चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए की जाती है। हालांकि केजरीवाल की सुरक्षा में गुजरात पुलिस की तैनाती ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आप का कहना है कि यह फैसला राजनीति से प्रेरित है। वहीं भाजपा इसे मानक प्रक्रिया बता रही है।
अरविंद केजरीवाल की सुरक्षा में बदलाव ने कानूनी और राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। जहां चुनाव आयोग की प्रक्रिया कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए मानक है। वहीं इस विशेष निर्णय ने इसकी मंशा और वैधता पर सवाल खड़े किए हैं।
जैसे-जैसे इस मुद्दे पर बहस जारी है। ध्यान इस पर है कि राजनीतिक हस्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थापित कानूनी ढांचों और प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन किया जाए।












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