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Delhi Chunav 2025: पहली बार राजस्व घाटा संकट की ओर दिल्ली,रेवड़ियों के लिए कहां से होगा जुगाड़?

Delhi Chunav 2025: जानकारों का कहना है कि दिल्ली ऐतिहासिक तौर पर रेवेन्यू-सरप्लस स्टेट के रूप में जानी जाती रही है। लेकिन, पहली बार यहां के लिए राजस्व घाटे का अनुमान जताया गया है। सवाल है कि दिल्ली का सरकारी खजाना पहले से ही सब्सिडी के बोझ से दबा हुआ है। ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों ने जो फिर से चुनावी रेवड़ियां बांटने के वादे किए हैं, उसके लिए पैसों का जुगाड़ कहां से होगा?

अंग्रेजी अखबार ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में दिल्ली के राजस्व-घाटे वाले राज्य की श्रेणी में खिसकने का अनुमान जाहिर किया गया है। कुछ महीने पहले भी इसी तरह की एक रिपोर्ट दिल्ली सरकार के वित्त विभाग के बजट प्रभाग के अनुमानों के हवाले से भी आई थी।

delhi chunav 2025

Delhi Chunav 2025: 1993 के बाद पहली बार दिल्ली के लिए राजस्व घाटे का अनुमान

इस तरह से यह पहली बार होगा, जब 1993 में दिल्ली विधानसभा के पुनर्गठन के बाद से दिल्ली को राजस्व घाटे का सामना करना होगा। अक्टूबर में भी सरकारी अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि, 'राजस्व घाटे की बहुत ही ज्यादा संभावना है, इस स्थिति से दिल्ली सरकार पर विपरीत असर पड़ सकता है।'

Delhi Chunav 2025: सभी राजनीतिक दल दे रहे हैं चुनावी रेवड़ियां बांटने की गारंटी

दिल्ली का खजाना पहले से ही सब्सिडी की मार झेल रहा है। इसके बावजूद तीनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों- आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और बीजेपी ने चुनावी रेवड़ियों को लेकर तमाम तरह के वादे किए हैं और यह आगे भी होने की संभावना है।

मसलन, आप ने महिला सम्मान योजना के तहत हर महिला को हर महीने 2,100 रुपए की आर्थिक सहायता देने का वादा किया है। इसके अलावा पुजारियों और ग्रंथियों को भी 18,000 रुपए सैलरी की तरह देने का वादा किया गया है।

कांग्रेस ने युवाओं को हर महीने स्टाइपेंड के नाम पर 8,500 रुपए देने की बात कही है तो महिलाओं को भी प्यारी दीदी योजना के तहत 2,500 रुपए देने का एलान किया है।

Delhi Chunav 2025: इन चुनावी वादों को पूरा करने के लिए कहां से आएंगे पैसे?

वहीं बीजेपी ने अभी कोई औपचारिक वादे तो नहीं किए हैं, लेकिन यह जरूर कह रही है कि आप सरकार की किसी भी कल्याणकारी योजना को बंद नहीं करेगी। सवाल है कि अगर दिल्ली राजस्व घाटे की ओर बढ़ रही है, तो नए वादों और पुरानी योजनाओं के लिए अगली सरकार पैसे कहां से लाएगी? क्योंकि, दिल्ली के खजाने पर सब्सिडी का मौजूदा बोझ पर नजर डालें तो आंखें फटी रह जाएंगी-

Delhi Chunav 2025: सब्सिडी के बोझ की मार झेल रही दिल्ली का हाल समझिए

तथ्य यह है कि वित्त वर्ष 2014-15 में जब दिल्ली में राष्ट्रपति शासन था, तब सब्सिडी पर 1,554.72 करोड़ रुपए खर्च हो रहे थे, जो कि चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 10,996.34 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

सब्सिडी में 607% की यह बढ़ोतरी आम आदमी पार्टी के शासन के दौरान पिछले 10 वर्षों में हुई है। इस समय दिल्ली सरकार अपने 9 विभागों के माध्यम से 27 योजनाओं पर सब्सिडी दे रही है, जिसमें से आप सरकार की कुछ बहुत ही चर्चित योजनाएं शामिल हैं।

Delhi Chunav 2025: दिल्ली में बड़ी सब्सिडी के लिए चर्चित योजनाएं

2015 के आम चुनावों में आप की सरकार दिल्ली वालों को मुफ्त बिजली-पानी देने के वादे पर बनी थी। यही वजह है कि जब आप की सरकार बनी तो बिजली पर जो सब्सिडी 291.94 करोड़ रुपए की थी, वह चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 3,600.50 करोड़ हो चुकी है। यह 1,233% से भी ज्यादा की बढ़ोतरी है। आप ने चुनाव जीतने पर हर महीने 200 यूनिट फ्री बिजली देना शुरू किया था।

इसी तरह से आप की सरकार हर महीने 20,000 लीटर पानी फ्री में दे रही है। इस वजह से 10 वर्षों में पानी पर दी जाने वाली सब्सिडी 20.83 करोड़ रुपए से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 500 करोड़ रुपए हो चुकी है। यह 2,300% का इजाफा है।

आम आदमी पार्टी ने 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को डीटीसी की बसों में मुफ्त यात्रा वाली योजना शुरू की थी। इस वजह से डीटीसी को फ्री ट्रैवल के तौर पर जो 70.17 करोड़ की सब्सिडी मिलती थी, वह 242% बढ़कर 240 करोड़ रुपए हो चुकी है।

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