Delhi Blast का मास्टरमाइंड अब घेरे में! फरार आतंकी मुजफ्फर राथर पर इंटरपोल का शिकंजा, रेड कॉर्नर नोटिस तय!
Delhi Blast Update News: दिल्ली में लाल किले के पास हुए विस्फोट मामले में फरार चल रहा आतंकी डॉ. मुजफ्फर राथर अब ज्यादा दिन तक कानून से बच नहीं पाएगा। जांच एजेंसियों के मुताबिक इंटरपोल जल्द ही उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने जा रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पहले ही उसे भगोड़ा घोषित कर चुकी है और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश तेज हो गई है।
पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ रहा मुजफ्फर राथर जांच में आतंकी हमले का अहम साजिशकर्ता निकला। जांच एजेंसियों का दावा है कि राथर ने लाल किले के बाहर हुए विस्फोट की योजना बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उसने हमलावर डॉ. उमर को न सिर्फ जरूरी सामान मुहैया कराया, बल्कि करीब छह लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की थी। यह रकम हमले की तैयारी और नेटवर्क को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल की गई।

भारत छोड़कर ऐसे हुआ फरार
जांच में सामने आया कि राथर अगस्त में भारत छोड़कर पहले दुबई गया और वहां से अफगानिस्तान पहुंच गया। माना जा रहा है कि वह फिलहाल अफगानिस्तान के सुरक्षित ठिकानों में छिपा हुआ है और वहीं से आतंकी नेटवर्क को दिशा दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार, वह इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को उकसाने और संसाधन जुटाने में भी शामिल रहा है।
विदेश से रची गई थी हमले की साजिश
एजेंसियों का कहना है कि राथर ने भारत से बाहर रहते हुए लाल किले के पास विस्फोट की पूरी रूपरेखा तैयार की। उसने अफगानिस्तान में मौजूद सहयोगियों के साथ मिलकर फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट सुनिश्चित किया। जांच में यह भी सामने आया कि राथर लंबे समय से आतंकी संगठनों के संपर्क में था और सक्रिय रूप से उनके लिए काम कर रहा था।
तुर्की यात्रा और आतंकी नेटवर्क
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि साल 2021 में राथर, डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई तुर्की गए थे। इस यात्रा को आतंकी नेटवर्क से संपर्क साधने और भविष्य की रणनीति तय करने से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके बाद गनई ने खुले बाजार से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री इकट्ठा करनी शुरू कर दी थी। आरोपियों ने 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जमा किया था, जिसे विश्वविद्यालय परिसर के पास छिपाया गया था।
कैसे खुला पूरा टेरर मॉड्यूल?
पिछले साल 19 अक्टूबर को श्रीनगर के नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर मिलने के बाद इस पूरे आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ। श्रीनगर पुलिस की जांच में गनई की गिरफ्तारी हुई और भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए गए। इस कार्रवाई से घबराकर डॉ. उमर ने तय योजना से पहले ही लाल किले के बाहर धमाका कर दिया।
मौलवी इरफान की भूमिका
जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि शोपियां का रहने वाला मौलवी इरफान अहमद भी इस नेटवर्क का हिस्सा था। पहले पैरामेडिक और बाद में इमाम बने इरफान पर आरोप है कि उसने डॉक्टरों और युवाओं को गुमराह कर कट्टरपंथ की ओर धकेला। उसकी गिरफ्तारी के बाद कई अहम कड़ियां एजेंसियों के हाथ लगीं।
अब इंटरपोल की बारी!
अधिकारियों का कहना है कि रेड कॉर्नर नोटिस जारी होते ही मुजफ्फर राथर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश तेज हो जाएगी। किसी भी देश में उसकी मौजूदगी की सूचना मिलते ही उसे हिरासत में लिया जा सकेगा। जांच एजेंसियों को भरोसा है कि लाल किले धमाके का यह अहम साजिशकर्ता जल्द ही भारत लाया जाएगा और कानून के कठघरे में खड़ा होगा।












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