16 अगस्त को होगा दिल्ली विधानसभा का सत्र, संसद से सेवा विधेयक पास होने की वजह से महत्वपूर्ण

16 अगस्त को दिल्ली विधानसभा का सत्र आयोजित किया गया है। संसद से दिल्ली सेवा विधेयक पास होने के बाद, विधानसभा के इस सत्र की अहमियत बढ़ गई है। इस विधेयक के पास होने के बाद दिल्ली में सेवा से जुड़े विषयों पर केंद्र का नियंत्रण स्थापित हुआ।

विधानसभा के सचिव की ओर से सूचना दी गई है कि विधानसभा स्पीकर की ओर से एनसीटी दिल्ली की सातवीं विधानसभा के चौथे सत्र को फिर से आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। इसमें कहा गया है कि इस आधार पर चौथे सत्र का तीसरा हिस्सा 16 अगस्त, बुधवार से शुरू होगा।

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    16 अगस्त को होगा दिल्ली विधानसभा का सत्र, संसद से सेवा विधेयक पास होने की वजह से महत्वपूर्ण

    16 अगस्त को दिल्ली विधानसभा का सत्र
    इस सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं। दिल्ली में हाल में आई बाढ़ और संसद से गवर्मेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली (अमेंडमेंट) बिल, 2023 पास होने के बाद सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और विपक्षी बीजेपी के सदस्यों के बीच जोरदार बहस होने की संभावना है।

    दिल्ली सेवा विधेयक को लेकर केंद्र से है नाराजगी
    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी की अगुवाई वाले केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह पिछले दरवाजे से सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है। आम आदमी पार्टी के संयोजक ने इसे (विधेयक पास होने वाले दिन को) भारतीय लोकतंत्र के लिए 'काला दिन' कहा है।

    संसद में भी हुई थी विधानसभा सत्र की चर्चा
    गौरतलब है कि सोमवार को इस विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि देश में दिल्ली विधानसभा एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जिसका सत्रावसान नहीं होता है और 2020 से 2023 के बीच यह सिर्फ बजट सत्र के लिए बुलाई गई है।

    दिल्ली बीजेपी ने भी की थी सत्र बुलाने की मांग
    इससे पहले 28 जुलाई को दिल्ली बीजेपी ने आम आदमी पार्टी सरकार से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की थी। पार्टी यह मांग यमुना में आई बाढ़ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए की थी। साथ ही पार्टी ने दावा किया है कि सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए जो मुआवजा घोषित किया है, वह बहुत कम है।

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने दिल्ली सरकार से यह भी जानकारी मांगी थी कि सरकार ने जो 10,000 रुपए की वित्तीय सहायता घोषित की थी, उससे कितने लोग लाभांवित हुए हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि मुआवजे की घोषित की गई रकम बहुत ही कम है और इससे पीड़ितों की जरूरतें पूरी नहीं होंगी। (इनपुट-पीटीआई, तस्वीर-फाइल)

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