Delhi AQI Today: जहरीली हवा के बीच सांसों पर संकट बरकरार, किस स्तर पर है AQI? SC में आज फिर होगी सुनवाई
Delhi AQI Today: राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की चादर में लिपटी नजर आई। रविवार की सुबह लोग घरों से निकले तो उन्हें ठंड के अलावा आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और बदबूदार हवा का सामना करना पड़ा। हवा में धुंध इतनी घनी थी कि कई इलाकों में इमारतें धुंध में गायब नजर आईं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताज़ा आंकड़ों ने हालात की गंभीरता साफ कर दी, AQI 385, यानी 'बहुत खराब'। कई जगह तो स्थिति इससे भी आगे निकल चुकी है और हवा 'गंभीर' श्रेणी तक पहुंच गई है। मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि तापमान में गिरावट और हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषण आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट सोमवार को फिर इस गंभीर मुद्दे पर सुनवाई करेगा।

दिल्ली की सुबह फिर जहरीली हवा के बीच शुरू हुई। सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी का कुल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 385 दर्ज हुआ, जो "बहुत खराब" श्रेणी में आता है। कई इलाकों में हालात इससे भी बदतर रहे और हवा "गंभीर" स्तर तक पहुंच गई।
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कई इलाकों में AQI गंभीर
शहर के 18 एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों ने "गंभीर" श्रेणी का AQI दर्ज किया। 20 स्टेशनों पर AQI 300 से ऊपर रहा, जो "बहुत खराब" स्थिति को दिखाता है। लगातार बढ़ता प्रदूषण लोगों की सेहत के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। प्रदूषण के बीच दिल्ली की सुबह ज्यादा ठंडी रही।
सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई आज
राष्ट्रीय राजधानी और एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा पर सुप्रीम कोर्ट आज, 17 नवंबर को फिर सुनवाई करेगा। यह सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पराली जलाना और ठहराव वाला मौसम प्रदूषण को तेजी से बढ़ा रहा है।
पिछली सुनवाई 12 नवंबर को हुई थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की जगह अब CJI बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने हवा की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी। कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की रिपोर्ट मांगी थी।
विशेषज्ञों की तीखी टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि इतने खराब हालात के बावजूद आम निर्माण कार्य, जैसे ड्रिलिंग, खुद सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर भी जारी हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों के लिए ऐसे काम बंद होने चाहिए।
अमाइकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने भी सरकारी आंकड़ों में अंतर होने पर सवाल उठाए और कहा कि प्रदूषण अब बेहद खतरनाक स्तर पर है।
कड़ी कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त राय
CJI गवई की पीठ लगातार इस मुद्दे की निगरानी कर रही है। कोर्ट इससे पहले आयोग फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) से मॉनिटरिंग और कार्रवाई की रिपोर्ट मांग चुका है। केंद्र सरकार को भी सलाह दी गई थी कि पराली जलाने वालों पर कड़े जुर्माने और जरूरत पड़े तो गिरफ्तारी जैसी सख्त कार्रवाई पर विचार किया जाए।
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