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Delhi AQI Today: राजधानी में प्रदूषण का कहर जारी, हवा हुई और खराब, कितना है आज दिल्ली में AQI?

Delhi AQI Today: दिल्ली की सुबह आज फिर एक बार धुंध की मोटी चादर में ढकी नजर आई। सूरज का प्रकाश भी प्रदूषण की घनी परतों को चीरकर बाहर नहीं निकल पा रहा था। शहर की हवा में तैरते जहरीले कणों ने लोगों को आंखों में जलन, सांस में भारीपन और गले में कसक के साथ दिन की शुरुआत करने पर मजबूर किया। कई इलाकों में तो दृश्यता इतनी कम रही कि वाहन चालकों को सुबह-सुबह हेडलाइट्स का सहारा लेना पड़ा।

24 घंटे का औसत AQI 399 दर्ज हुआ, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है। पिछले तीन दिनों से हवा 'सीवियर' लेवल पर थी, ऐसे में आज हल्की गिरावट दिखी, लेकिन लोगों के लिए यह गुणवत्ता अभी भी खतरनाक बनी हुई है। पिछले कई दिनों से प्रदूषण लगातार 'सीवियर' स्तर पर बना हुआ था, और आज थोड़ी गिरावट के बाद भी हवा का स्तर इतना खराब है कि विशेषज्ञ इसे "स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक" बता रहे हैं। दिल्ली फिर उसी सवाल से जूझ रही है-आखिर कब मिलेगी साफ हवा?

Delhi AQI Today

कुछ इलाकों में मामूली सुधार

CPCB के 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों के अनुसार, DTU स्टेशन पर दिल्ली की सबसे बेहतर हवा रिकॉर्ड हुई, जहां AQI 270 रहा। IHBAS, दिलशाद गार्डन में AQI 297 दर्ज हुआ, जो 'पुअर' श्रेणी में आता है। ये दोनों स्टेशन आज उन कम जगहों में रहे, जहां हवा ने थोड़ी राहत दी।

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वज़ीरपुर और चांदनी चौक सबसे ज्यादा प्रभावित

दिल्ली के ज़्यादातर स्टेशनों पर चौथे दिन भी AQI 'सीवियर' श्रेणी में रहा। वज़ीरपुर में AQI 447 दर्ज हुआ, जबकि चांदनी चौक में 445 का स्तर रहा। 'सीवियर' श्रेणी की हवा में सेहतमंद लोग भी सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और सीने में भारीपन महसूस कर सकते हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा के संपर्क में रहना फेफड़ों की बीमारियों और कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। कुल 25 मॉनिटरिंग स्टेशनों ने 'सीवियर' हवा दर्ज की, जबकि 11 स्टेशन 'बेहद खराब' श्रेणी में रहे।

हल्की हवा और गिरता तापमान बढ़ा रहे परेशानी

Skymet Weather के मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के अनुसार, हल्की हवा और तापमान में लगातार गिरावट से प्रदूषण ज़मीन के पास ही फंस जा रहा है। उन्होंने बताया, "हवाएं काफी कमजोर हैं, सिर्फ 5-7 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही हैं। रात में तो हवाएं लगभग रुक जाती हैं, जिससे स्मॉग और घना हो जाता है।"

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन परिस्थितियों में इनवर्जन लेयर बनती है, जिसमें प्रदूषक ऊपर नहीं जा पाते और हवा ज़हरीली बनी रहती है।

पराली जलाने का असर कम हुआ, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार

  • DSS के आंकड़ों के अनुसार, इस हफ्ते दिल्ली के PM2.5 स्तर में पराली जलाने का बड़ा योगदान रहा।
  • 12 नवंबर को इसका असर 22.4% तक पहुंच गया था, जो इस सीजन का सबसे ज्यादा स्तर था। गुरुवार को इसका योगदान घटकर करीब 12% हो गया, लेकिन प्रदूषण पर इसका असर अभी भी दिख रहा है।

दिल्ली की हवा बिगड़ने के कई कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की हवा को बिगाड़ने में कई कारण एक साथ जिम्मेदार हैं- ट्रैफिक का धुआं, फैक्ट्री उत्सर्जन, आसपास के राज्यों में पराली जलाना और मौसम की धीमी चाल। ये सभी मिलकर हालात को और खराब बना रहे हैं। जब तक हवाएं तेज नहीं होंगी और तापमान में बदलाव नहीं आएगा, तब तक स्मॉग से राहत मिलना मुश्किल है।

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