Delhi की AQI से बच्चों की पढ़ाई पर दोहरी मार, हाइब्रिड क्लासेस में ‘नो नेटवर्क डिवाइस’ की कमी ने बढ़ाई टेंशन
Delhi Hybrid Classes Crisis: देश की राजधानी दिल्ली सोमवार, 17 नवंबर की सुबह फिर उसी धूंध भरी चादर में लिपटी नजर आई, जिसके साथ अब यहां की सर्दी हर साल शुरू होती है। हवा में फैला जहरीला धुआं, आंखों में चुभन, सड़क पर रेंगती ट्रैफिक लाइटें-ये सब मिलकर एक बार फिर बता रहे थे कि सर्दियों के साथ दिल्ली में स्मॉग सीजन भी लौट आया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 359 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है।

लेकिन राजधानी की हवा से ज्यादा भारी एक और बोझ अभिभावकों और स्कूलों पर पड़ा-कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए लागू की गई 'हाइब्रिड क्लासेस' की व्यवस्था।
हाइब्रिड क्लासेस ने बढ़ाई टेंशन?
दिल्ली सरकार द्वारा GRAP-III के तहत 11 नवंबर से लागू किए गए हाइब्रिड मॉडल का उद्देश्य था-जहरीली हवा से बच्चों को बचाना। लेकिन यह मॉडल ज़मीन पर उतरते ही कई परिवारों के लिए उलझन और असुविधा का पहाड़ बन गया। कोविड-19 महामारी के समय डिजिटल संसाधनों की कमी ने बच्चों की पढ़ाई पर जो घाव छोड़े थे, वही दर्द फिर उभर गया है।
कई अभिभावक कहते हैं कि महामारी खत्म हो गई है, लेकिन डिजिटल डिवाइड का संकट अब भी जिंदा है-शायद पहले से भी ज्यादा टीस देता हुआ। इसी तरह, कई सरकारी स्कूलों में आज भी बुनियादी इंटरनेट सुविधा का अभाव है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि कई स्कूलों में एक ही डोंगल है, जो कभी रिचार्ज रहता है, कभी नहीं। इससे शिक्षक मजबूर होकर अपने मोबाइल डेटा पर क्लास लेते हैं।
सरकार कहती है-तैयारी पूरी
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद का दावा है कि स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में पढ़ाई सुचारू रहे। उन्होंने कहा, छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए GRAP-III लागू किया गया है। सभी स्कूलों को ऑनलाइन क्लासेस के लिए टाइमटेबल बनाने और उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
लेकिन ज़मीनी हकीकत अक्सर सरकारी दावों का आईना नहीं बन पाती। शिक्षकों का कहना है कि न तो स्कूलों में पर्याप्त लैपटॉप हैं, न टैबलेट, न ही वाईफाई का मजबूत ढांचा। कई स्कूल तो इस बुनियादी ढांचे की तैयारी की सूची में भी शामिल नहीं दिखते।
खराब AQI : दिल्ली के फेफड़ों पर एक और भारी दिन
दिल्ली के कई इलाकों में हवा का हाल बेहद चिंताजनक रहा। सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में बवाना का AQI 427 दर्ज हुआ-जो सीधे-सीधे 'गंभीर' श्रेणी में आता है।
इसके अलावा:
- ITO: 394
- चांदनी चौक: 383
- पाटपड़गंज: 369
- आरके पुरम: 366
- पंजाबी बाग: 384
- इंडिया गेट-कर्तव्य पथ: 341
इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली का हर कोना जहरीली हवा की मार झेल रहा है। साथ ही, तापमान 9°C के आसपास पहुंच चुका है-जो 2022 के बाद नवंबर की सबसे ठंडी सुबहों में से एक है। ठंड और प्रदूषण का यह मिलाजुला प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए और घातक साबित हो रहा है।
दिल्ली की खराब हवा, टेक्नोलॉजी और शिक्षा की उलझी डोर
दिल्ली में प्रदूषण का मौसम हमेशा से स्वास्थ्य की चिंता लेकर आता है, लेकिन इस बार इसके साथ जुड़ गई है डिजिटल असमानता की कटु सच्चाई। यह स्थिति दिखाती है कि केवल आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं होता।
ऑनलाइन शिक्षा तभी संभव है जब हर घर में डिवाइस, हर स्कूल में मजबूत इंटरनेट और हर छात्र को समान पहुंच मिले।
लेकिन आज भी हजारों बच्चों का भविष्य एक फोन, कमजोर डेटा और सीमित संसाधनों पर टिक हुआ है। एक तरफ जहरीली हवा बच्चों को घर में रहने को मजबूर कर रही है, तो दूसरी तरफ शिक्षा का बोझ घर की दीवारों पर खड़ा होकर सवाल पूछ रहा है-क्या दिल्ली तैयार है? या फिर हमने महामारी की सीखों को भूलने में जल्दी कर दी?












Click it and Unblock the Notifications