Delhi News: आप MLA नरेश बाल्यान के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, वर्चुअली पेश होने के दिए निर्देश
Delhi News: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एमसीओसीए के तहत चल रहे एक मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बाल्यान से जुड़े दो आरोपियों की वर्चुअल उपस्थिति का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया है कि 19 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आरोपियों रोहित और सचिन चिकारा की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
मामला विशेष अदालत में स्थानांतरण पर विचार
दिल्ली पुलिस ने ट्रायल कोर्ट द्वारका से सभी आरोपियों के मामलों को राउज एवेन्यू स्थित विशेष सांसद, विधायक अदालत में स्थानांतरित करने की याचिका दायर की है। पुलिस ने यह दलील दी है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत ही सभी आरोपियों का केस देखे।

न्यायालय ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं। ताकि आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जा सके। सह-आरोपी रितिक के वकील ने मामले को विशेष अदालत में स्थानांतरित करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। हालांकि अन्य दो आरोपियों के किसी भी प्रतिनिधि ने नोटिस के बावजूद अदालत में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई।
एमसीओसीए मामले में विधायक बाल्यान की भूमिका
दिल्ली पुलिस ने नरेश बाल्यान को 4 दिसंबर को एमसीओसीए के तहत चल रहे एक कथित जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किया था। विशेष सांसद/विधायक अदालत ने बाल्यान को 9 जनवरी 2025 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने उनकी पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग को अस्वीकार कर दिया।
एमसीओसीए मामलों की गंभीरता
एमसीओसीए के तहत मामले आम तौर पर संगठित अपराध और जबरन वसूली जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े होते हैं। नरेश बाल्यान का नाम इस मामले में आने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में खलबली मच गई है। पुलिस का कहना है कि बाल्यान से जुड़े सभी आरोपियों का मामला एक ही अदालत में चलाया जाना चाहिए। ताकि कानूनी प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
19 दिसंबर को वर्चुअल उपस्थिति के बाद होगी सुनवाई
न्यायालय अब इस पर विचार करेगा कि मामले को विशेष अदालत में स्थानांतरित किया जाए या नहीं। 19 दिसंबर को आरोपियों की वर्चुअल उपस्थिति के बाद स्थानांतरण याचिका पर आगे की सुनवाई होगी।
आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बाल्यान से जुड़े एमसीओसीए मामले ने एक बार फिर राजनीतिक नेताओं और संगठित अपराध के बीच संबंधों पर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय का यह आदेश कानूनी प्रक्रिया को तेज करने और सभी पक्षों को न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मामले का भविष्य अब इस पर निर्भर करेगा कि विशेष अदालत में स्थानांतरण को लेकर अदालत क्या निर्णय लेती है।
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