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AIMIM ने रमजान में शराब के ठेके बंद करने की मांग, शोएब जमई की 'एक्स' पोस्ट से छिड़ी बहस

AIMIM Demands Liquor Ban: आज यानी 19 फरवरी 2026 से भारत भर में रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) ने रमजान के पवित्र महीने के दौरान दिल्ली में सभी शराब के ठेके बंद करने की मांग उठाई है।

पार्टी का कहना है कि जिस तरह सावन के महीने में धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए कई जगहों पर मांस और नॉन-वेज की दुकानों को बंद कराया जाता है, उसी तरह रमजान में भी मुस्लिम समुदाय की आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए।

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दिल्ली की जामा मस्जिद और फतेहपुरी मस्जिद से चांद दिखने के ऐलान के बाद आज पहला रोजा रखा गया है। इसी बीच, AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई ने दिल्ली की बीजेपी सरकार से एक ऐसी मांग कर दी है, जिसने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

Shoaib Jamei Liquor Ban Tweet: शोएब जमई की दलील- सावन में नियम, तो रमजान में क्यों नहीं?

डॉ. शोएब जमई ने अपने पोस्ट में लिखा, हमारी दिल्ली सरकार से अपील है कि रमजान के पवित्र महीने में दिल्ली के अंदर सभी शराब की दुकानों को बंद किया जाए। सार्वजनिक स्थानों पर शराब की बिक्री और खपत पर पाबंदी लगाई जाए। जब आप सावन के महीने में नॉन-वेज की दुकानें बंद कराकर सम्मान चाहते हैं, तो हमारे पवित्र महीने में भी आपको सम्मान करना चाहिए।

AIMIM का तर्क है कि रमजान सिर्फ उपवास का महीना नहीं, बल्कि संयम, आत्मशुद्धि और सामाजिक सद्भाव का समय होता है। ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर शराब की बिक्री और सेवन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।

Sawan Meat Ban vs Ramadan Liquor Ban: रमजान की शुरुआत, धार्मिक माहौल में सियासी बयान

गौरतलब है कि गुरुवार से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है। दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद से शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी ने चांद दिखने के बाद रमजान शुरू होने की घोषणा की थी। रमजान के दौरान मुसलमान रोज़ा रखते हैं, नमाज अदा करते हैं और खुदा से मगफिरत की दुआ करते हैं।

इस महीने को इस्लाम में रहमत (दया), मगफिरत (माफी) और नजात (मोक्ष) का महीना माना जाता है। रोज़ेदार सुबह सहरी करते हैं और शाम को इफ्तार के साथ रोज़ा खोलते हैं। मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ होती है और कुरान शरीफ की तिलावत व खतम का विशेष महत्व होता है।

रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय में दान, जकात और फितरा देने की परंपरा भी निभाई जाती है। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने का अहम हिस्सा माना जाता है। AIMIM का कहना है कि ऐसे धार्मिक माहौल में शराब की खुली बिक्री सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है।

सियासी बहस की आशंका

AIMIM की इस मांग के बाद दिल्ली की राजनीति में बहस तेज होने की संभावना है। एक ओर जहां पार्टी इसे धार्मिक सम्मान और समानता का सवाल बता रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार और अन्य राजनीतिक दल इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सबकी नजर टिकी है।

अब देखना यह होगा कि दिल्ली सरकार रमजान के दौरान शराब दुकानों को बंद करने की AIMIM की अपील पर कोई फैसला लेती है या नहीं, और क्या यह मुद्दा आने वाले दिनों में सियासी तकरार का रूप लेता है। जहां एक पक्ष इसे 'धार्मिक समानता' से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे 'ध्रुवीकरण की राजनीति' बता रहा है।

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