पंक्चर बनाने वाले के बेटे ने यूं तय क‍िया दिल्ली में विधायक बनने का सफर

दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर से बड़ी जीत हासिल की है। 'आप' ने इस बार 62 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है, इनमें से ज्यादातर सीटें ऐसी हैं जहां पर पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। इन्हीं में से एक हैं दिल्ली की जंगपुरा सीट, जहां से प्रवीण कुमार लगातार दूसरी जीते हैं।

आज भी पंचर की दुकान चलाते हैं प्रवीण के पिता

आज भी पंचर की दुकान चलाते हैं प्रवीण के पिता

प्रवीण कुमार मूल रूप से भोपाल के रहने वाले हैं। प्रवीण के पिता पीएन देशमुख की भोपाल के बोगदापुर में पंचर बनाने की दुकान है। बेटे के विधायक बनने के बाद भी उन्होंने यह काम नहीं छोड़ा है। मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बेटा जब पहली बार विधायक बना तो भी हमने उसी यही सीख दी कि तुम्हें यह मुकाम ईमानदारी के कारण मिला है। ईमानदारी को मत छोड़ना। इसी का नतीजा है कि जंगपुरा के लोगों ने दूसरी बार उस पर भरोसा जताया। मैंने बेटे से हमेशा यही कहा कि लोगों ने जिस वजह से तुम पर भरोसा जताया है, उनके भरोसे को कभी मत तोड़ना।

अन्ना आंदोलन से बदली किस्मत

अन्ना आंदोलन से बदली किस्मत

बता दें, प्रवीण की पढ़ाई-लिखाई भोपाल में हुई। पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली आकर नौकरी करने लगे। यहां 2011 में प्रवीण ने अन्ना आंदोलन में भाग लिया। वह अन्ना आंदोलन से इतना प्रभावित हुए कि दिल्ली के एक मल्टीनेशनल कंपनी की 50 हजार रुपए महीने की नौकरी भी छोड़ ​दी।

लगातार दूसरी बार बने विधायक

लगातार दूसरी बार बने विधायक

इसके बाद जब अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी की स्थापना की तो वो 'आप' से जुड़ गए। इसके बाद प्रवीण कुमार को 2015 में आम आदमी पार्टी ने जंगपुरा सीट से उम्मीदवार बनाया और चुनाव जीतकर प्रवीण कुमार विधायक बन गए। पांच साल तक दिल्ली में जनता का विश्वास जीतने के बाद वह 2020 के चुनाव दोबारा चुनाव लड़े और जनता ने उनपर विश्वास जताते हुए उन्हें लगातार दूसरी बार जिताया।

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