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उत्तराखंड में आयुर्वेद के डॉक्टरों को इमरजेंसी में एलोपैथिक दवा लिखने की मंजूरी, विरोध में उतरी IMA

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देहरादून, 21 जून। उत्तराखंड सरकार के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयुर्वेद डॉक्टरों को इमरजेंसी में एलोपैथिक दवा लिखने का अधिकार देने के फैसले को एलोपैथिक चिकित्सकों के शीर्ष निकाय भारतीय चिकित्सा परिषद (आईएमए) ने अवैध बताया है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने आयुर्वेद चिकित्सकों को बड़ी सौगात देते हुए उन्हें आपातकालीन स्थिति में एलोपैथिक दवा लिखने के अधिकार को मंजरी दे दी है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भी इस फैसले पर अपनी मौहर लगा दी है।

IMA

हरक सिंह रावत ने इस मौके पर कहा कि आयुर्वेदिक डॉक्टर लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। आयुर्वेद चिकित्सक लंबे समय से पूछ रहे थे कि क्या उन्हें हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की तरह एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा असर पड़ेगा।

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उन्होंने कहा, 'हमने आपातकालीन स्थितियों में एलोपैथिक दवाओं को निर्धारित करने की उनकी (आयुर्वेद डॉक्टरों की) मांग को मंजूरी दे दी है। हमें उम्मीद है कि इस फैसले से राज्य के दूरदराज के इलाकों में हजारों लोगों को काफी मदद मिलेगी क्योंकि वहां शायद ही कोई एलोपैथिक डॉक्टर है।' दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों धाराओं (एलोपैथिक और आयुर्वेदिक) के विशेषज्ञ इस बहस में उलझे हुए हैं कि क्या एलोपैथी आयुर्वेद से बेहतर है।

English summary
In Uttarakhand, Ayurveda doctors were allowed to prescribe allopathic medicine in emergency, IMA came out in protest
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