धरती को गर्म होने से बचा रहा है वायु प्रदूषण

सालाना लाखों लोगों की जान लेने वाला वायु प्रदूषण धरती को गर्म होने से रोक रहा है और अगर यह कम हुआ तो पृथ्वी का तापमान इतना बढ़ सकता है कि लाखों लोगों की जान जा सकती है. दरअसल वायु प्रदूषण के कारण सूरज की बेहद तेज किरणें धरती तक नहीं पहुंच पाती हैं और तापमान कम रहता है. अगर वायु प्रदूषण कम हुआ तो जलवायु परिवर्तन और तेज हो जाएगा.
वैज्ञानिकों के लिए यह एक ऐसी उलझन है, जिसके कारण वे पसोपेश में पड़ गये हैं. चीन में एक दशक लंबे अध्ययन के बाद यह जलवायु विशेषज्ञों ने यह बात कही है.
उलटी पड़ीं प्रदूषण घटाने की कोशिशें
पिछले एक दशक में चीन में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर कोशिशें हुई हैं. इसके चलते खासतौर पर कोयला संयंत्रों से निकलने वाले सल्फर डाईऑक्साइड के स्तर में कमी हुई है. चीन के आधिकारिक आंकड़ों और कई अध्ययनों के बाद कहा गया है कि कार्बन उत्सर्जन में 90 फीसदी तक कमी आई है. इससे हजारों जानें भी बची हैं.
फिर भी चीन का औसत तापमान 2014 के बाद से 0.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है. इस कारण हीट वेव की बारंबारता और तीव्रता में वृद्धि हुई है. इसकी एक वजह वातावरण में छितरी हुई वायु प्रदूषण की परत की सघनता का कम होना है. यह परत सूर्य की खतरनाक किरणों को परावर्तित करती है और तापमान को बढ़ने से रोकती है. लेकिन इस परत के कमजोर पड़ने से तापमान बढ़ता है.
अमेरिका के नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉसफेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) में जलवायु वैज्ञानिक पैट्रिशिया क्विन कहती हैं, "यह बड़ी उलझन है. हम हवा को साफ करने के लिए अपनी वायु गुणवत्ता बढ़ाना चाहते हैं लेकिन ऐसा करके हम गर्मी बढ़ा रहे हैं."
सल्फर की परत कमजोर हुई
वायु प्रदूषण कम करने को वैज्ञानिक 'अनमास्किंग' कहते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि चीन के कुछ ओद्यौगिक नगरों में अनमास्किंग का प्रभाव ग्रीन हाउस गैसों से कहीं ज्यादा रहा है. उनके मुताबिक अगर भारत और मध्य-पूर्व जैसे अन्य अत्याधिक प्रदूषित देश चीन की राह पर चलते हैं और सल्फर डाईऑक्साइड को कम करते हैं तो वहां भी ऐसे ही असर देखने को मिल सकते हैं.
वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि वायु की गुणवत्ता सुधारने की कोशिश दुनिया को तापमान बढ़ने की ओर झोंक सकती है, जिसके बेहद खतरनाक परिणाम होंगे.
इसी साल यूएन पर्यावरणीय मामलों की समिति आईपीसीसी ने एक रिपोर्ट जारी की है. उस रिपोर्ट के मुख्य शोधकर्ता और पर्यावरण भौतिकविज्ञानी पॉउलो आर्टैक्सो कहते हैं, "एयरोसोल ग्रह की कम से कम एक तिहाई गर्मी को रोके हुए हैं. अगर आप वायु प्रदूषण कम करने वाली तकनीकें इस्तेमाल करते हैं तो यह छोटी अवधि में जलवायु परिवर्तन को बहुत तेजी से बढ़ाएगा."
वैसे आईपीसीसी ने 2021 में भी अपनी रिपोर्ट में सल्फर डाईऑक्साइड घटने और ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ने के संबंध में चेताया था. उस रिपोर्ट में यह निष्कर्ष दिया गया था कि सल्फर डाई ऑक्साइड की सोलर छतरी ना होती तो दुनिया का औसत तापमान ओद्यौगिकीकरण से पहले की दुनिया के मुकाबले 1.6 फीसदी बढ़ चुका होता. यानी दुनिया द्वारा तय किए गए 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार होने से रोकने में इसी छतरी ने मदद की है.
वीके/एए (रॉयटर्स)
Source: DW
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