नहीं रहा नन्हा हाथी, जिसके लिए की जा रही थी दया मृत्यु की मांग
छत्तीसगढ़ में एक गंभीर रूप से घायल 5 साल हाथी शावक दया मृत्यु की मांग की गई थी, लेकिन उसने तड़प- तड़प का दम तोड़ दिया है।
जिस नन्हे हाथी के लिए दया मृत्यु की मांग की जा रही थी,उसने आखिरकार 12 दिन तक तड़प-तड़प के जीने के बाद दम तोड़ दिया है। छत्तीसगढ़ के जशपुर के रीड की हड्डी टूटे और दोनों पावों में लकवा ग्रस्त हाथी शावक की सोमवार को मौत हो गई। इस बीच वन विभाग ने मीडिया को हाथी शावक को देखने ना दिया, न ही उसके बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक की गई। वन विभाग के इस रवैये पर पशु प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं।

पर्यावरण प्रेमी और वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट नितिन सिंघवी ने एक बयान जारी करके कहा कई एक चीज समझ में नहीं आई कि जब रीड की हड्डी टूट गई थी, दोनों पांव में लकवा मार दिया था और जब वन विभाग को भी मालूम था कि वह जिंदा नहीं रह सकेगा ,तो उसका इलाज क्यों करवाते रहे? क्यों इतनी दर्दनाक मृत्यु दी गई? उन्होंने सवाल किया कि क्या दर्दनाक मृत्यु देना मानवता है? सात दिन पहले दया मृत्यु के लिए लिखे गए पत्र का संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में वन्यजीव प्रेमी एक नन्हे हाथी के लिए दया मृत्यु की गुहार लगा रहे थे । दरअसल सरगुजा संभाग के जशपुर के कुनकुरी रेंज में बीते 29-30 नवम्बर को गड्ढे में गिरने से 5 साल हाथी शावक की रीड की हड्डी टूट गई थी। इसके अलावा उसके पिछले दोनों पांवों में लकवा मारने से उसे मृत्यु तुल्य कष्ट भोगना पड़ रहा था। हाथी के बच्चे को उसके कष्ट से मुक्ति दिलाने के लिए रायपुर के वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने राज्य के मुख्य वन्य जीव संरक्षक ,सहप्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) को हाथी शावक को दया मृत्यु देने पत्र के लिए पत्र लिखा था।
नितिन सिंघवी ने पूर्व में ही वन विभाग को बता दिया था कि हाथी शावक को घाव होने लग गए है, जिससे शावक के शरीर में अगले दो-तीन दिनों में ही कीड़े पैदा हो जायेंगे, इससे मूक प्राणी को असहनीय दर्द होगा। कीड़े पैदा होने के बाद धीरे धीरे सेप्टिसीमिया यानि रक्त विषाक्तता (ब्लड पॉइजनिंग) विकसित हो जाएगी-यह तेजी से फैलने वाला ब्लड इनफेक्शन होता है। इसके बाद शावक के शरीर के कई अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देंगे, जिससे हाथी शावक की मृत्यु तड़प-तड़प कर होगी। इस आधार पर दया मृत्यु की मांग की गई थी।
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