छत्तीसगढ़ में नही चलेगी स्कूलों की मनमानी,ज्यादा फीस लेने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई।
रायपुर, 05 अप्रैल। कोरोना के बाद स्कूलों पर लगे प्रतिबंध अब हट चुके हैं ,इसी के साथ छत्तीसगढ़ में स्कूल एक बार फिर खुल गए हैं। नए शैक्षणिक सत्र को लेकर बच्चों और उनके अभिभावकों में जबर्दरस्त उत्साह है,लेकिन निजी स्कूलों की तरफ से पढाई के नाम पर ली जानी वाली भारीभरकम फीस को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है।
भूपेश बघेल सरकार ने छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों की तरफ से ली जाने वाली फीस के ढांचे को नियंत्रित करने के लिए दो वर्ष पूर्व शुल्क विनियमन अधिनियम बनाया था,लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के सुस्त एक्शन की वजह से उस पर गंभीरता से अमल तक नहीं हो सका । इस बार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद नए शिक्षा सत्र के दौरान एक बार फिर से स्कूलों ने मनमानी शुल्क वृद्धि की शिकायतों पर विभाग की तरफ से लिए जाने वाले एक्शनों पर नजर रखेंगे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिखाई संजीदगी
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की निर्देश के बाद राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने सभी कलेक्टर से कहा हैं कि निजी स्कूलों की मनमानी शुल्क पर कड़ाई से रोक लगाने के लिए तत्काल जिला स्तरीय शुल्क विनियमन समितियों का गठन किया जाये। साथ ही शुक्ला ने छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम-2020 के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

स्कूलों की फीस के संबंध में जानकारी एकत्रित करने निर्देश जारी
छत्तीसगढ़ के प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने अपने निर्देशों में सभी कलेक्टरों से कहा है, वह अपने जिले के सभी निजी स्कूलों की फीस के संबंध में जानकारी एकत्रित करके अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्यवाही करें। निजी विद्यालयों में बेलगाम तरीके से फीस न बढ़ाई जाए और पालकों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। सभी कलेक्टरों को नियमो से संबंधित पत्रों और अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए कानून की कॉपी भी भेजी गई है।
वर्ष 2020 को बनाये गए छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम के तहत धारा-10 (8) में स्पष्ट कहा गया है, कोई भी निजी स्कूल एक बार में अधिकतम 8 प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं बढ़ा सकता है । अगर यह ऐसा करता है ,तो उसे स्कूल स्तरीय शुल्क समिति से अनुमोदन करवाना होगा ।

कलेक्टरों को अधिनियम में प्राप्त हैं काफी अधिकार
अधिनियम की धारा-13 के मुताबिक विद्यालय शुल्क समिति के खिलाफ अपील सुनने का अधिकार जिला समिति को है। अधिनियम की धारा-4 के मुताबिक जिला फीस समिति के मुखिया जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी सचिव होते हैं । निजी स्कूलों की तरफ से बढ़ाई बेलगाम फीस को विनियमित करने के लिए जिला कलेक्टरों को अधिनियम में काफी अधिकार प्राप्त हैं ।

आखिर क्यों पड़ी जरूरत
दरअसल स्कूल खुलते ही छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों से इस तरह की जानकारियां आ रही थी कि प्राइवेट स्कूलों ने अपनी मनमानी शुरू कर दी है और उन्होंने स्कूल फीस को कई गुना बढ़ा दिया है। निजी स्कूलों का तर्क है कि कोरोना के चलते बीते दो साल से स्कूल बंद थे। इस दौरान महंगाई भी बढ़ चुकी है,इसलिए स्कूल चलाने के लिए फीस बढ़ाना मजबूरी है।
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