छत्तीसगढ़ में अब Tourism होगा महंगा, प्राइवेट एजेंसियां करेगी प्रदेश के 24 रिसॉर्ट्स का संचालन
छत्तीसगढ़ में पर्यटन के लिए अब घूमने फिरने के शौकीन पर्यटकों को अब थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। क्योंकि अब पर्यटन विभाग अपने बन्द होते होटल और रिसोर्ट को फिर से शुरू करने के लिए एक नई योजना तैयार की है।
अम्बिकापुर, 06, सितम्बर। छत्तीसगढ़ में पर्यटन के लिए अब घूमने फिरने के शौकीन पर्यटकों को अब थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। क्योंकि अब पर्यटन विभाग अपने बन्द होते होटल और रिसोर्ट को फिर से शुरू करने के लिए एक नई योजना तैयार की है। इस योजना के तहत प्रदेश भर में ऐसे 24 होटल और रिसोर्ट को पर्यटन विभाग अब 30 साल के लीज पर देने जा रहा है। इसकी तैयारी भी पूरी कर ली गई है। पहले चरण की निविदा में अंबिकापुर और रायगढ़ के लिए प्रक्रिया पूरी हो गई है। जबकि चित्रकूट के दंडामी रिसोर्ट के लिए टेंडर जारी किया गया है।

चित्रकूट का दंडामी रिसोर्ट 15 करोड़ का
छत्तीसगढ़ के नियाग्रा के कहे जाने वाले चित्रकूट में सरकार के चार करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं। इसके तीस साल के लिए मिनिमम बिडिंग प्राइस 15 करोड़ 94 लाख रखी गई है। वहीं वार्षिक बिडिंग प्राइस 53 लाख रुपये है यानी हर माह 4 लाख 42 हजार का किराया कम्पनी को देना होगा। यहां लगभग 20 से अधिक कमरों का सर्वसुविधायुक्त रिसोर्ट है।

45 हजार तक होगा किराया
अंबिकापुर के रिसोर्ट के लिए पांच लाख का ऑक्शन तय किया था जबकि मोटल को पंद्रह लाख में दिया गया, वहीं रायगढ़ के रिसोर्ट को 25 लाख में दिया गया है। विभाग ने प्रक्रिया के तहत इसके लिए निविदा निकाली थी। निजी कम्पनी को लीज पर पंद्रह लाख रुपए के अलावा 45 हजार रुपए हर महीने का किराया देना होगा। जबकि इसे बनाने में करीब एक करोड़ खर्च किया गया था।

मैनपाट मोटल का ऑफसेट प्राइज छह करोड़ रुपए
पर्यटन विभाग ने छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट स्थित अपने मोटल को भी लीज पर देने का फैसला किया है, लेकिन इसका ऑफसेट रेट सबसे अधिक है। करीब 22 एकड़ में फैले इस मोटल में 22 कमरे और हॉल हैं। किराए पर देने के लिए इसका ऑफसेट प्राइज छह करोड, जबकि साल का साढ़े तीन प्रतिशत के हिसाब से किराया 21 लाख होगा। उसी तरह अम्बिकापुर के मोटल में चार कमरे रेस्टोरेंट और मीटिंग हॉल है। करीब आठ साल से मोटल बंद पड़ा है। सारी सुविधाएं देने के बाद भी विभाग इसे नहीं चला पाया। पहले भी पांच साल के लिए मोटल को ठेके पर दिया था, लेकिन दो साल में ही संचालक ने हाथ खड़े कर लिए थे।

24 में से 10 रिसोर्ट हैं बन्द, मोटल का होगा मेन्टेन्स
प्रदेश में पर्यटन विभाग के कुल 24 रिसोर्ट है जिनमे से 10 बन्द पड़े हैं। वहीं अब रिसोर्ट व मोटलों को लीज पर देने के बाद इसे नए तरीके से शुरू करने में कम से कम एक साल लग जाएंगे। बन्द पड़े और पुराने सिस्टम से संचालित मोटल्स को नए सिरे से शुरुआत करने के लिए इसमें काफी सुधार करना पड़ेगा। हालाकि छह महीने का समय विभाग ने दिया है।

प्राइवेट एजेंसी के संचालन से सब कुछ हो जाएगा महंगा
अब पर्यटन के व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि निजी हाथों में जाने से खाने से लेकर ठहरने तक सारी सेवाएं महंगी गई जाएगी। लेकिन पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मोटल को काफी कुछ छूट के साथ लीज पर दिया है। एजेंसी विस्तार के लिए अपने हिसाब से निर्माण करा सकेंगे। टूरिज्म से संबंधित दुकान किराए पर दे सकेंगे। वहीं बार भी खोल सकते हैं।

स्थानीय रोजगार बढ़ने का दावा
निजी कम्पनियों के हाथों में संचालन होने के बाद पर्यटकों के लिए सुविधाएं और स्थानीय लोगों को इससे रोजगार मिलने की बात कही जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि निजी हाथों में जाने के बाद स्थानीय रोजगार में कमी आएगी क्योंकि निजी एजेंसी अपने कुशल कर्मचारियों की भर्ती करेगी।

दंडामी रिसॉर्ट ही फायदा देने वाला रिसोर्ट बाकि में नुकसान: अटल
पर्यटन मंडल के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव का कहना है कि प्रदेशभर के पर्यटन विभाग के मोटल को लीज पर देने का फैसला कैबिनेट ने किया है। राज्य में चित्रकोट का दंडामी रिसॉर्ट ही फायदा देने वाला रिसोर्ट है लेकिन बाकी नुकसान में हैं। बिडिंग प्राइस की रकम हमें 6 महीने में मिल जाएगी। हमने 3.5% प्रतिमाह लीज रेंट रखा हुआ है। यदि बिडर नहीं आते है तो रेट और कम किया जाएगा।












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