लाल गलियारे में पसरा सन्नाटा, माओवादी कैम्पों में DRG का खौफ, नक्सलियों ने गांवों से राशन लेना किया बंद
Naxal Red Corridor: माओवादियों ने अपनी रणनीति में परिवर्तन किया है। DRG के मज़बूत होने के कारण नक्सलियों ने इस हिस्से में रक्षात्मक रुख अपना लिया है।

District Reserve Guard Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बस्तर में अपने 10 जवानों को खोने के बाद राज्य के संवदेनशील हिस्सों में तैनात DRG यानी डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड ने हौसला नहीं खोया है। नक्सलियों में खेमे में डीआरजी की दहशत इस कदर फैली है,कि उन्होंने अपने ही कॉरिडोर से दूरी बना ली है।
कांकेर से गढ़चिरौली और बालघाट तक फैला है लाल गलियारा
मिली जानकारी के मुताबिक कांकेर,गढ़चिरौली ,मोहला-मानपुर और मध्यप्रदेश के बालाघाट के जंगलों से कवर्धा के भोरमदेव तक तैयार नक्सलियों के रेड कॉरिडोर में लंबे समय से सन्नाटा पसरा हुआ है। इन इलाकों में नक्सलियों की सक्रियता घटी रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों और पुलिस बल के मज़बूत हौसलों ने नक्सलियों की खदेड़ने का काम किया है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और मध्यप्रदेश के बालाघाट तक फैले लाल गलियारे में नक्सल संगठन की बड़ी बैठकें होती रही हैं। यहां माओवादी सक्रिय रूप से अपने संगठन को विस्तार देने से लेकर वारदातों की योजना तैयार करते थे। कभी इस कॉरिडोर में दर्जनों की तादाद में नक्सलियों का ठहरना रहता था,लेकिन फोर्स का दबाव बढ़ने पर मध्यप्रदेश , महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के इस कॉरिडोर में लगभग नदारत हैं।
चंद घंटों में स्थान बदल रहे हैं नक्सली
बताया जा रहा है कि इस इलाके में नक्सली कम हो गए हैं,अगर जंगलो से गुजरते भी हैं,तो चंद घंटों में स्थान बदल रहे हैं। दरअसल इस पूरे लाल गलियारे में डीआरजी की निगरानी है। हाल ही नक्सल कमांडर जमुना के एनकांउटर और डेविड की गिरफ्तारी के बाद डीआरजी ने इलाके में मजबूती के साथ अपनी धमक बढ़ाई है।
सड़क निर्माण कार्य में आई तेज़ी
इस लाल गलियारे में साल 2019 से कोरोचा से बुकमरका जाने वाली 10.70 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण जारी है। इस सड़क के निर्माण के दौरान करीब आधा दर्जन बार यहां पुलिस-नक्सल मुठभेड़ हो चुकी थी,लेकिन फ़िलहाल शांति होने से काम में तेजी आई है। बताया जा रहा है कि यह काम फोर्स की मदद से एक महीने में पूरा हो जाएगा। लगभग साढ़े 7 किलोमीटर का डामरीकरण बचा हुआ है।
नक्सलियों ने बंद किया राशन जुटाना
अब माओवादियों ने अपनी रणनीति में परिवर्तन किया है। DRG के मज़बूत होने के कारण नक्सलियों ने इस हिस्से में रक्षात्मक रुख अपना लिया है। वह एक बड़े हिस्से में कोई भी मूवमेंट नहीं कर रहे हैं, जिसकी जानकारी पुलिस तक पहुंचे। पुलिस महकमे का कहना है कि नक्सली जंगलों से लगे गांवों में राशन लेने के पहुंचते रहे हैं,जिसकी सूचना फोर्स को इसकी मिल जाती थी। अब नक्सल संगठन ने फोर्स से बचने के लिए गांवों से राशन लेना भी बंद कर दिया है।
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