छत्तीसगढ़ः जशपुर में आदिवासी युवतियां बनीं मैकेनिक, भारी वाहनों की कर रही हैं मरम्मत

जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की आदिवासी युवतियों ने कमाल कर दिया है। कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत वर्ष 2017 में मिली ट्रेनिंग में इन्होंने न केवल खुद को बदल दिया, बल्कि अपना जीवन स्तर भी सुधार लिया है। शुरुआती दौर में इन्हें खूब ताने कसे गए कि साइकिल तो ठीक से सुधार नहीं सकतीं, बड़ी-बड़ी गाड़ियां क्या सुधारेंगी। यह काम केवल पुरुषों का है। मगर, इन सबकी परवाह न करते हुए इन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। आज इनकी काबिलियत की खूब तारीफ हो रही है। ये एक बड़े वर्कशॉप में नौकरी करती हैं। रोजाना कई चारपहिया आटोमेटिक गाड़ियों की मरम्मत करती हैं। आज ये इतनी दक्ष हो गई हैं कि गाड़ी चालू करते ही उसकी गड़बड़ियों को भांप लेती हैं।

jashpur tribal girls become mechanic and repair heavy vehicles

जशपुर के छोटे से गांव कुर्रांग निवासी सुमित्रा नागवंशी ने बताया कि वे किसान परिवार से आती हैं। पढ़ाई भी ज्यादा नहीं की हैं। उनकी सभी साथियों की यही पारिवारिक स्थिति है। जिला प्रशासन की ओर से जब प्रशिक्षण देने की जानकारी मिली तो एकबारगी लगा कि वे कहां कर पाएंगी। मगर, कुछ नया करने का जुनून था। ऐसे में प्रशिक्षण शुरू किया। धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ता गया और आज उनकी पूरी टीम दक्ष मैकेनिक हैं।

सुमित्रा ने बताया कि 20 युवतियों ने एक साथ प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद यह प्रशिक्षण प्रशासन की ओर से दोबारा नहीं दिया गया। प्रशिक्षण पूरा होते ही सभी की एक बड़े वर्कशॉप में नौकरी लग गई। शुरुआत में छोटी गाड़ियों की मरम्मत करती थीं। धीरे-धीरे बड़ी गाड़ियों का काम भी करने लगीं। जशपुर की ही सुरंती ने बताया कि आज से कार से लेकर ट्रक तक की मरम्मत करती हैं। शादी हो जाने के कारण कुछ युवतियों ने नौकरी छोड़ दी है। सुमित्रा ने बताया कि शुरुआत में वे पांच-छह हजार रुपये तक ही महीना कमाती थीं, लेकिन आज वे 15 हजार रुपये तक कमा लेती हैं। इससे उनके जीवन स्तर में भी काफी बदलाव आया है।

आदिवासी युवतियों ने खुद को साबित किया

वर्ष 2017 में तत्कालीन कलेक्टर रहीं डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि यह कार्यक्रम गरीब परिवार की होनहार युवतियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए उन्होंने कौशल विकास के तहत आयोजित किया था। वे नया प्रयोग करना चाहती थीं, जिसमें सफल भी रहीं। जशपुर जैसे आदिवासी बहुल इलाके की ये युवतियां आज आटोमोबाइल सेक्टर में बेहतर प्रदर्शन कर खुद को साबित कर रही हैं कि पुरुषों का ऐसा कोई भी काम नहीं, जो महिलाएं नहीं कर सकतीं। ये अन्य युवतियों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।

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