दिलचस्प हुआ खैरागढ़ उपचुनाव, दिवंगत विधायक देवव्रत सिंह की पूर्व पत्नी करेंगी कांग्रेस के पक्ष में प्रचार !
It is interesting that Khairagarh by-election, Devvrat Singh's ex-wife will campaign in favor of Congress
राजनांदगांव,29 मार्च। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में हो रहे खैरागढ़ उपचुनाव का मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के विधायक रहे देवव्रत सिंह की मृत्यु के बाद खाली हुई कांग्रेस और बीजेपी ने इस चुनाव में खैरागढ़ राजपरिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार नहीं बनाया है, लेकिन फिर भी चुनावी राजनीति राजपरिवार के आसपास ही घूम रही है।

पद्मा सिंह करेंगी कांग्रेस का प्रचार
एक समय दिवंगत हो चुके विधायक देवव्रत सिंह ने खुद के खून में कांग्रेसी डीएनए होने की बात कही थी, लेकिन वह बाद में जोगी कांग्रेस चले गए थे। इस बीच यह बात निकल कर सामने आ रही है कि कांग्रेस से टिकट ना मिलने के बाद देवव्रत सिंह की पहली पत्नी पद्मा सिंह भी खुद में कांग्रेस का डीएनए होने की बात कहकर कांग्रेस का प्रचार करेंगी। वह अपने बच्चों के साथ घर-घर जाकर कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करेंगी।
बीजेपी के बड़े नेताओं की नींद हराम हो चुकी है:कांग्रेस
डीएनए पॉलिटिक्स को लेकर कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि पूर्व सीएम अजीत जोगी के निधन के बाद जब मरवाही उपचुनाव हुआ था। तब जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने बीजेपी का समर्थन किया था। दिवंगत विधायक देवव्रत सिंह पहले कांग्रेस में थे ,फिर बाद में जोगी कांग्रेस ज्वाइन की ,उन्होंने भाजपा का प्रचार करने संबंधी अपनी पार्टी के इस फैसले का विरोध भी किया था।
देवव्रत सिंह को छत्तीसगढ़ के वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व ने बहुत अपमानित किया था:अजय चंद्राकर
शुक्ला का कहना है कि भूपेश बघेल सरकार के विकास कार्यो और जनता से मिलते समर्थन की वजह से छत्तीसगढ़ में भाजपा मुद्दाविहीन हो चुकी है। बीजेपी के बड़े नेताओं की नींद हराम हो चुकी है, इसलिए वह समय घबराहट में रहते है। वहीं भाजपा प्रवक्ता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने ट्वीट में लिखा है कि - देवव्रत सिंह को छत्तीसगढ़ के वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व ने बहुत अपमानित किया था, इसलिए उनको कांग्रेस छोड़नी पड़ी थी, खैरागढ़ की जनता अपने राजा का अपमान कभी भी नहीं भूलेगी।
खतरे में है खैरागढ़ राजघराने का अस्तित्व
खैरागढ़ राजघराने का अस्तित्व खैरागढ़ रियासत के विधानसभा बनने तक के सफर के बीच आजादी के पहले से इस स्थान पर राजघराने का ही राजनीतिक दबदबा कायम रहा है। खैरागढ़ में हुए विधानसभा चुनावों हमेशा ही जीत का सेहरा राजघराने के वारिसों के सिर पर ही बंधा है। एक जमाने में पूर्व पीएम राजीव गांधी के क्लासमेट रहे राजा शिवेंद्र बहादुर सिंह राजनांदगांव से सांसद थे। देवव्रत सिंह शिवेंद्र बहादुर सिंह के भतीजे थे। देवव्रत सिंह की मौत के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि भाजपा या कांग्रेस खैरागढ़ राजघराने से जुड़े किसी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया है, इससे इस सीट से किसी नए व्यक्ति के राजनीतिक उदय होने के साथ खैरागढ़ राजपरिवार की दखल खत्म हो सकती है।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की खैरागढ़ विधानसभा के लिए होने वाला उपचुनाव कई मायनो में खास है। 4 नवंबर 2021 को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ यानि जोगी कांग्रेस के विधायक देवव्रत सिंह ने निधन हो जाने के बाद से यह सीट खाली है। खैरागढ़ विधानसभा के लिए 12 अप्रैल को मतदान और 16 अप्रैल को मतगणना होनी है। कांग्रेस, भाजपा, जोगी कांग्रेस समेत कई अन्य दल के प्रत्याशी भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएंगे।












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