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IIT Bhilai में बनी इस डिवाइस से आपका शुगर रहेगा कंट्रोल, 20 चूहों पर किया गया सफल प्रयोग

छत्तीसगढ़ में IIT भिलाई के प्रोफेसरों ने डायबिटीज पेशेंट्स के लिए एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है। जो ऑटोमेटिक इंसुलिन इंजेक्ट करेगा। जिससे बार-बार इंसुलिन से होने वाले दर्द से मरीजों को राहत मिलेगी।

IIT Bhilai Insulin

छत्तीसगढ़ के रायपुर में स्थित IIT भिलाई के छात्र और प्रोफेसर बदलते जमाने के साथ नई तकनीकों की खोज कर जीवन शैली को आसान बनाने में लगे हैं। इस बार IIT भिलाई के प्रोफेसरों ने डायबिटीज मरीजों के लिए एक स्मार्ट डिवाइस तैयार किया है। जिसके तहत माइक्रो नीडल बनाया गया है। जो डायबीटिक मरीजों को बार बार इन्सुलिन के दर्द से राहत देगा।

IIT BHILAI

IIT के प्रोफेसरों ने तैयार किया डिवाइस
यह डीवाइस IIT भिलाई के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सुचेतन पाल ने बताया कि 2 साल की कड़ी मेहनत के बाद उनकी टीम ने स्मार्टेडिवाइस बनाया है। उनकी टीम में मैकेनिकल इंजीनियर डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विजय दुर्योधन, और एक स्टूडेंट अकबर अली है। उन्होंने इस पर पीएचडी की है। इस स्मार्ट इंसुलिन का नाम उन्होंने माइक्रो नीड सूलिन रखा है।

IIT lab

ऑटोमेटिक काम करेगा डिवाइस
डॉ सुचेतन पाल के अनुसार यह स्मार्ट माइक्रो निडील शरीर में ब्लड के सम्पर्क में रहेगा, शुगर की मात्रा कम होगी या बढ़ेगी वैसे ही यह डिवाइस दवा को बॉडी में इंजेक्ट कर देगा। इंसुलिन लेने के बाद खाना नहीं खाने से शुगर गिर जाता है। इस डिवाइस की खासियत यह है कि यह मनुष्य के शरीर में बैंडेट की तरह चिपका रहेगा, और शुगर की मात्रा को जांच करता रहेगा। जैसे ही डाइबिटीज से पीड़ित व्यक्ति का शुगर लेवल बढ़ेगा व डिवाइस अपने आप ही शरीर की आवश्यकता ने अनुसार इंसुलिन इंजेक्ट कर देगा

चावल के स्टार्च से बनाया गया बारीक सुई
दरअसल इस डिवाइस की खास बात यह है कि इसमें बने बारिक सुई को चावल के स्टार्च से बनाया गया है। जबकि दूसरे इंजेक्शन के निडिल स्टील के बने होते हैं। जिससे यह बहुत ही सस्ते दर पर आम जनता को उपलब्ध हो सकेगा। छत्तीसगढ़ में आसानी से चावल का स्टार्ट सस्ते में मिल जाता है। इससे यह प्रोडक्ट लगभग 100 रुपये में लोगों को मिल सकेगा।

20 चूहों पर किया गया रिसर्च
इस पर रिसर्च कर रहे टीम के स्टूडेंट अकबर ने बताया कि इस रिसर्च के लिए भारत सरकार साइंस एंड इंजीनियरिंग बोर्ड के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी से 27 लाख रुपये का फंड जारी किया गया था। पिछले 2 साल से दो एक्सपर्ट और एक स्टूडेंट इस पर रिसर्च कर रहे थे। अभी भी इस पर शोध जारी है। कि इस डिवाइस के उपयोग से कितने समय तक मरीज का शुगर समान्य रहता है। इसके लिए उन्होंने 20 चूहों पर चार बार प्रयोग किया जा चुका है। अब इसे इंसानों पर प्रयोग किया जाएगा। जिसके लिए एम्स रायपुर के डॉक्टरों से चर्चा की जा रही है।

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