Google Boy Video : सूर्यपथ फाउंडेशन में कक्षा एक का बच्चा भी बता दे रहा भगवान राम की 40 पीढ़ियों के नाम
छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर के आदित्य नगर में स्थित सूर्यपथ फाउंडेशन गणित माध्यम का अपने आप में एक अनूठा विद्यालय है। यहां के बच्चों को चलता-फिरता गूगल बॉय कहा जा सकता है।

Suryapath Foundation School Durg City Chhattisgarh : भारत में गूगल बॉय माने हरियाणा का कौटिल्य पंडित। बहुमुखी प्रतिभा का यह बच्चा सवालों के जवाब इंटरनेट पर सर्च इंजन गूगल की तरह फटाफट जवाब देता है। कुछ ऐसा ही टेलेंट छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर के आदित्य नगर में स्थित सूर्यपथ फाउंडेशन के बच्चों में है। यहां के बच्चों को छत्तीगसढ़ के 'कौटिल्य पंडित' और सूर्यपथ फाउंडेशन को गूगल बॉय 'फैक्ट्री' कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं है। यहां के बच्चे भगवान श्रीराम की 40 पीढ़ियों तक के नाम सेकंडों में ही बता देते हैं। (वीडियो नीचे)
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सूर्यपथ फाउंडेशन दुर्ग संस्था प्रधान का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में सूर्यपथ फाउंडेशन दुर्ग के संस्था प्रधान (सूर्यकांत) राजेश पंवार ने बताया कि बच्चों को वैदिक संस्कृति और भारत के सनातन धर्म का ज्ञान प्रदान करने के मकसद से सूर्यपथ फाउंडेशन नाम से स्कूल शुरू किया गया है। यह ज्ञान देने के लिए तमाम जगहों पर गुरुकुल संचालित हैं, मगर सूर्यपथ फाउंडेशन के उद्देश्य शिक्षा की गुरुकुल पद्वति से अलग हैं, मगर यहां पर बच्चों को वैदिक संस्कृति के साथ गणित व विज्ञान भी उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान की जा रही है।

ये बच्चे गूगल से कम नहीं
राजेश पंवार की मानें तो सूर्यपथ फाउंडेशन को 2 साल पहले शुरू किया गया था। आठवीं तक की मान्यता प्राप्त गणित माध्यम के इस स्कूल में अभी पांचवीं तक के करीब सौ बच्चे पढ़ रहे हैं। इनमें से 10 से ज्यादा बच्चे आदिवासी परिवारों से हैं। यहां कक्षा एक की काव्या, दो की अंजलि, चार का तन्मय, तन्मय का छोटा भाई मुकुल (केजी-2) समेत अनेक ऐसे स्टूडेंट हैं, जो धर्म, ग्रंथों व गणित से जुड़े सवालों के जवाब तुरंत दे देते हैं।

दसवीं कक्षा तक का ज्ञान
यहां के बच्चे भले ही पांचवीं तक की कक्षाओं में अध्ययन कर रहे हों, मगर गणित, विज्ञान व सनातम धर्म से संबंधित ज्ञान के मामले में दसवीं कक्षा के तक के बच्चों को टक्कर दे रहे हैं। यहां पर पांचवीं कक्षा के बच्चे दसवीं कक्षा की गणित के सवाल चुटकियों में हल कर देते हैं। इसके पीछे सूर्यपथ फाउंडेशन के आठ शिक्षकों के पढ़ाने का गजब तरीका है।
पांचवीं तक के बच्चे कर रहे यूपीएससी की तैयारी!
संस्था प्रधान राजेश पंवार कहते हैं कि अन्य प्रदेशों की तरह छत्तीसगढ़ में भी नियम है कि आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल नहीं किया जाता है। इसी बात का फायदा उठाते हुए सूर्यपथ फाउंडेशन ने तय किया कि जब फेल-पास का कोई मसला ही नहीं तो क्यों बच्चों को केवल खानापूर्ति के लिए पढ़ाया ना जाकर निर्माण किया जाए। वो भी ऐसा कि पांचवीं तक के बच्चे ही यूपीएससी की तैयारी वाले सवाल हल करते देख हर कोई दंग रह जाए। ऐसा यहां हो भी रहा है।
क्या क्या पढ़ते हैं सूर्यपथ फाउंडेशन के बच्चे?
स्कूलों में बच्चों को इतिहास के रूप में मुगल आक्रांताओं के बारे में बताया जाता है, जबकि सूर्यपथ फाउंडेशन सनातन धर्म व वैदिक संस्कृति के बारे में बताते हैं। यहां के बच्चे-बच्चे को हिंदू, गीता, रामायण, जैन तीर्थंकर, बौद्ध व सिख धर्म गुरुओं के बारे में विस्तार से पता है। भगवान श्रीराम की तो 40 पीढ़ियों के बारे में बता देते हैं। गणित व विज्ञान के लिए 12वीं कक्षा के कोटा जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पांचवीं के स्टूडेंट ने पास की दसवीं कक्षा
राजेश पंवार के गिरिश कटरे भी सूर्यपथ फाउंडेशन के बच्चों के लिए प्रेरणादाायी हैं। गिरिश जब पांचवीं कक्षा में थे तब उसने दसवीं बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया और पास भी हुआ। अभी 11वीं कक्षा में पढ़ रहा है जबकि उसके हमउम्र बच्चे अभी कक्षा में अध्ययनरत हैं।












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