Chhattsgarh: पहाड़ भी नहीं डिगा सका ग्रामीणों का हौसला, दुर्गम क्षेत्र बछवारपारा में जल्द तैयार होगा पहला स्कूल

छत्तीसगढ़ में एक तरफ जहां प्रदेश में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए पहले से बने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया जा रहा है,वहीं ऐसे इलाको में स्कूल खोले जा रहे हैं,जहां कभी कोई शाला भवन था ही नहीं।

बलरामपुर, 06 जुलाई। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास हो रहे हैं। एक तरफ जहां प्रदेश में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए पहले से बने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया जा रहा है,वहीं ऐसे इलाको में स्कूल खोले जा रहे हैं,जहां कभी कोई शाला भवन था ही नहीं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के बछवारपारा इलाके में करीब 18 साल बाद स्कूल बनने का काम शुरू हो चुका है।

40 बच्चो को मिलेगा नया स्कूल

40 बच्चो को मिलेगा नया स्कूल

आदिवासी बाहुल्य सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले में कई ऐसे गांव हैं,जहां पहुंचना आसान नहीं है।ऐसे ही गांव बछवारपारा के ग्रामीणों के लिए गुरुवार का दिन खास था, क्योंकि गांव के बच्चों को अब एक नया स्कूल मिलने वाला है। दरअसल इस गांव के एक कच्चे मकान में स्कूल चलता है। इसी स्कूल में करीब 40 बच्चे अपनी पढाई करते हैं,लेकिन जल्द ही वह अपने नए स्कूल में शिफ्ट हो जायेंगे,क्योंकि सरकार की पहल और ग्रामीणों की मेहनत से बछवापारा में पहला स्कूल बनने जा रहा है।

दशकों से थी स्कूल बनाने की मांग

दशकों से थी स्कूल बनाने की मांग

बछवापारा शहरी क्षेत्र से बहुत दूर हैं। पहाड़ चढ़कर ही इस दुर्गम क्षेत्र में पहुंचा जा सकता है। गांव तक पहुंच आसान नहीं होने से आज़ादी के बाद भी यह इलाका विकास तो दूर एक स्कूल तक के लिए तरसता रहा है। एक पूरी पीढ़ी पढाई के लिए कई किलोमीटर तक का रास्ता तय करती रही है,लेकिन हालात बदलने लगे हैं। दशकों तक अनसुनी की गई ग्रामीणों की फ़रियाद प्रशासन ने सुन ली है। बछवापारा के ग्रामीण अपने बच्चो की फ़िक्र में लम्बे समय से पक्के स्कूल भवन की मांग कर रहे थे,जिसे कलेक्टर विजय दयाराम ने सुन लिया है।

 9 किलोमीटर का कठिन सफर ,कंधो पर निर्माण सामग्री

9 किलोमीटर का कठिन सफर ,कंधो पर निर्माण सामग्री


बछवापारा में स्कूल बनाना आसान काम नहीं है,क्योंकि पहाड़ो में बसे इस गांव तक भवन निर्माण सामग्री लाने के लिए मजदूरों को काफी मेहनत करनी पद रही है। कई किलोमीटर की चढ़ाई और पैदल यात्रा करके मजदूर अपने कांधों पर स्कूल भवन निर्माण सामग्री लेकर पहुंच रहे हैं। यह काम जोखिम भरा भी है क्योंकि करीब 9 किलोमीटर तक पहाड़ में भारी सामान लेकर चढ़ाई करना आसान काम नहीं है।

बलरामपुर के कलेक्टर विजय दयाराम ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया है कि बछवारपारा पहुंचविहीन इलाका है। करीब 18 साल पूर्व इस क्षेत्र में स्कूल भवन का निर्माण स्वीकृत किया गया था, लेकिन बन नहीं पाया। जनदर्शन के दौरान यह स्थिति मेरे संज्ञान में आई, तब ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल बनाने का काम शुरू किया गया है। हमे उम्मीद है कि करीब डेढ़ माह में स्कूल पूरी तरह बनाकर तैयार हो जायेगा।

अब पढ़ाई भी होगी और बच्चे सुरक्षित भी रहेंगे

अब पढ़ाई भी होगी और बच्चे सुरक्षित भी रहेंगे

नया स्कूल बनाने के साथ ही गांव के 40 बच्चों को पढ़ाई के साथ सुरक्षा भी मिल जाएगी। दरअसल ग्राम पंचायत खड़ियादामर के बछवारपारा में अब मिटटी के बने एक कच्चे मकान में स्कूल का संचालन हो रहा था। प्रशासन से कई दफा स्कूल भवन की मांग करने के बाद भी स्कूल ना बनने के कारण इसी कच्चे भवन में बच्चों को पढ़ना पड़ रहा था। बरसात के दिनों इस भवन के गिरने का भी खतरा बना हुआ था। बहराहल अब बछवारपारा के ग्रामीण बेहद खुश हैं।

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