सिंहदेव के दिल्ली दौरे से बढ़ी हलचल,सियासी चर्चाओं को मिला बल
छत्तीसगढ़ में भले ही चुनाव को लगभग डेढ़ साल का वक़्त ही बचा है,लेकिन कुर्सी की जंग भाजपा और कांग्रेस के बीच कम बल्कि कांग्रेस की कांग्रेस के खिलाफ ही अधिक नजर आ रही है।
रायपुर,30 जुलाई। छत्तीसगढ़ में भले ही चुनाव को लगभग डेढ़ साल का वक़्त ही बचा है,लेकिन कुर्सी की जंग भाजपा और कांग्रेस के बीच कम बल्कि कांग्रेस की कांग्रेस के खिलाफ ही अधिक नजर आ रही है। दरअसल छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र खत्म होते ही एक बार फिर भूपेश और सिंहदेव खेमे के कांग्रेस विधायकों की घेराबंदी शुरू हो गई है। इसी के साथ छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन के कयासों को बार फिर हवा मिल गई है। गौरतलब है कि कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव ने कुछ दिन पूर्व ही पंचायत विभाग से इस्तीफा देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चिट्ठी लिखकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था।

दिल्ली में हैं सिंहदेव, दौरे पर सबकी नजर
हाल ही में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव ने पंचायत मंत्री के पद से इस्तीफा देकर प्रदेश की सियासत में उफान ला दिया था। सबसे अहम बात यह रही कि इस्तीफा देने के बाद से सिंहदेव दिल्ली चले गए और इस बीच विधानसभा के मानसून सत्र में भी हिस्सा नहीं लिया। सिंहदेव ने यह बात स्पष्ट कर दी थी कि दिल्ली प्रवास के दौरान उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि वह कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर सकें,लेकिन अभी तक सोनिया गांधी ने उन्हें मिलने का वक़्त नहीं दिया है।

सिंहदेव की उम्मीद बरकरार,भूपेश खेमे मे चिंता का माहौल
माना जा रहा है कि सिंहदेव आलाकमान से मिलकर एक बार फिर वह कथित वादा याद दिलाएंगे, जिसमे ढाई साल बाद मुख्यमंत्री का पद दिए जाने पर सहमति बनी थी। साढ़े तीन साल का समय गुजर जाने के बाद भी सिंहदेव की उम्मीद बरकरार है,लेकिन भूपेश बघेल अब भी मुख्यमंत्री के पद पर काबिज हैं। बहरहाल सिंहदेव के दिल्ली में डेरा जमाने से भूपेश खेमे के विधायको में चिंता का माहौल है। इन्ही हालातों के बीच सीएम भूपेश बघेल भी दिल्ली का चक्कर लगा आए हैं, लेकिन उन्हें भी कांग्रेस आलाकमान से मिलने का अवसर नहीं मिल सका है।

बात नहीं सुनी गई, तो सिंहदेव उठा सकते है बड़ा कदम
बीते साल भूपेश सरकार के ढाई साल पुरे होते ही सिंहदेव को मुख्यमंत्री बनाये जाने के कयासों के बीच कांग्रेस के 52 विद्यायकों ने दिल्ली में सीएम भूपेश बघेल के पक्ष में जबर्दस्त लॉबिंग की थी,जिसमे बाद आलाकमान ने भूपेश बघेल पर ही अपना भरोसा कायम रखा था,लेकिन अब एक बार फिर माहौल गर्माता नजर आ रहा है। बीते साल भले ही केंद्रीय नेतृत्व ने किसी तरह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सिंहदेव के बीच विवाद को फौरी तौर पर सुलझाने में कामयाबी हासिल की थी,लेकिन संगठन का यह प्रयास एक साल भी नहीं टिक सका है।
चर्चा जोरो पर है कि सिंहदेव ने केंद्रीय संगठन को उनका वादा याद दिलाने के लिए ही पंचायत विभाग से इस्तीफा दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि वह आलाकमान से मिलकर सरकार में उनकी स्थिति से अवगत कराकर अपनी बातें रखेंगे। इसके बाद भी उनकी बातों को अनसुना कर दिया जाता है , तो वह भूपेश कैबिनेट से इस्तीफा देकर महज विधायक की भूमिका में नजर आ सकते हैं।

कांग्रेस विधायक को अकेले दिल्ली ना जाने की सलाह
माना जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव और विधानसभा सत्र निपटाते ही एक बार फिर भूपेश और सिंहदेव खेमे के विधायको की दिल्ली दौड़ शुरू होने वाली थी,लेकिन सोनिया गांधी से ईडी की पूछताछ और उसके विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन की वजह से कार्यक्रम टाला गया, लेकिन इसी दमरियन टीएस सिंहदेव ने विधानसभा का सत्र छोड़कर दिल्ली का रुख कर कर लिया है,जिससे भूपेश खेमे में चिंता के बादल मंडराने लगे हैं।सूत्र बता रहे हैं कि दोनों ही पक्षों के विधायको के कार्यक्रमों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। बहरहाल किसी भी कांग्रेस विधायक को अकेले दिल्ली ना जाने की सलाह दी गई है।












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