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छत्तीसगढ़ हसदेव अरण्य बचाओ अभियान: कोयला खदान के लिए जंगल काटने पहुंचा प्रशासन, ग्रामीणों ने जताया विरोध

अंबिकापुर, 30 मई। छत्तीसगढ़ में इस समय चारो तरफ हसदेव अरण्य के जंगलो को बचाने के लिए हो रहे आंदोलन की आवाज गूंज रही है। सोमवार को पुलिस फोर्स की मौजूदगी में अंबिकापुर स्थित परसा कोयला खदान के लिए एक बार फिर हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। सरकार के दल ने जंगल से करीब 70 पेड़ काट दिए,जिसके बाद हाथों में लाठी-डंडे लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण विरोध में उतर आए हैं।बहरहाल माहौल गरम होता देख बाद कटाई रोक दी गई और पूरा इलाका छावनी में बदल हो गया है। इधर मामले में सियासत भी तेज हो गई है।

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दरअसल, देश दुनिया में विरोध के बावजूद राज्य सरकार ने एक बार फिर हसदेव के जंगलों में पेड़ों की कटाई की शुरू करवा दी है।मिली जानकारी के मुताबिक है कि सोमवार सुबह से ही कोयला खदान प्रभावित घाटबर्रा के पेंड्रामार जंगल में बड़ी तादाद में पुलिस बल को तैनात कर पेड़ों की कटाई शुरू करा दी गई थी।जब तक यह बात ग्रामीणों तक पहुंची, तब तक 60- 70 पेड़ काटे जा चुके थे। ग्रामीणों ने पेड़ो की कटाई का विरोध करते हुए ,सरकार के खलाफ जमकर नारेबाजी की,जिसके बाद वन विभाग और पुलिस की टीम को पीछे हटना पड़ा। छत्तीसगढ़ बचाओ अभियान के संयोजक आलोक शुक्ला ने पेड़ो की कटाई का वीडियो ट्ववीट करते हुए लिखा कि आज सुबह पुनः हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा ईस्ट केते बासेन कोल ब्लॉक के दूसरे चरण के लिए भारी पुलिस फोर्स लगाकर पेड़ो की कटाई शुरू करवा दी गई। ग्रामीणों के द्वारा विरोध जारी है।

बहरहाल इस मामले में सियासत भी देखने को मिली। पेड़ो की कटाई को लेकर हो रहे विरोध के बीच छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल भी मौके पर पहुच गए और हसदेव बचाओ आंदोलन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।वही आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रभारी सजीव झा ने ट्वीट किया कि राहुल जी आपने हसदेव के जंगल काटने के मुद्दे पर कहा था कि जो आदिवासी मूलनिवासी छत्तीसगढ़ में आंदोलन कर रहे है उनके साथ आप खड़े है, और एक सप्ताह में रिजल्ट दिख जाएगा। तो क्या राहुल गाँधी आप इस प्रकार आदिवासी मूलनिवासी छत्तीसगढ़ के साथ खड़े है कि पूरा फोर्स लगा कर जंगल की कटाई करवाई जा रही है।इससे मतलब साफ है कि या फिर आपकी कांग्रेस में ही नही सुनी जा रही है? या फिर आपकी भी मिलीभगत है? याद रखना छत्तीसगढ़ की जनता आपको कभी माफ़ नही करेगी।


मिली जानकारी में मुताबिक पुलिस ने आंदोलनकारियों पर नजर रखने के लिए से घाटबर्रा के जंगल में दो ड्रोन कैमरे निगरानी में रखे हुए हैं। दरअसल उदयपुर क्षेत्र के हरिहरपुर, फतेहपुर और साल्ही ग्राम पंचायत के 2019 से ग्रामीण कोयला खदान खोलने का साल विरोध कर रहे हैं। वह नहीं चाहते कि किसी भी कीमत में कोयला खदान के लिए हसदेव अरण्य के जंगलो को काटा जाये। ग्रामीण छत्तीसगढ़ बचाओ अभियान के संयोजक आलोक शुक्ला की अगुवाई में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक को पत्र लिख चुके हैं । बीते साल ग्रामीणों ने सरगुजा से रायपुर तक 300 किलोमीटर पैदल राज्यपाल के सामने अपनी पीड़ा रखी थी ,फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।

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ज्ञात हो कि उदयपुर क्षेत्र में पहले से परसा ईस्ट बासेन कोयला खदान चल रही है। इस खदान के लिए 640 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। साल 2028 तक खनन किया जाना था, लेकिन उससे पूर्व ही खनन कर लिया गया,इसके साथ ही इस माईन्स के सेकंड फेज के लिए अनुमति मिल गई है।तब से घाटबर्रा गांव में काफी लोग खदान विरोध में हैं। इस खदान में कोयले का खनन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादक निगम लिमिटेड के लिए अडानी कोयला माइनिंग को करना है, जिसके लिए उसे 12 सौ हेक्टेयर जमीन खदान दी गई है। कोयला खनन करने के लिए 841 हेक्टेयर जंगल काटना पड़ेगा। जिससे चार गांव के 250 परिवार विस्थापित हो जाएंगे,वहीं करीब साढ़े चार लाख पेड़ काट दिए जायेंगे।

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