CG Police: ट्रैकर मैगी को नम आंखों से पुलिस विभाग ने दी विदाई, 5 साल पहले हुआ था पदस्थ

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आज मैगी को अंतिम विदाई देते हुए, पुलिस जवानों की आंखे नम हो गई। क्योकिं अपनी वफादारी से सबका दिल जीतने वाले मैगी ने 5 साल में पुलिस विभाग को कई मामलों में सफलता दिलाई है। मैगी का आकस्मिक निधन होने से गरियाबंद बटालियन के निरीक्षक उमेश राय ने कर्मचारियों सहित ससम्मान विदाई दी। स्पेशल डॉग्स मैगी की ट्रेनिंग भिलाई के ट्रेनिंग सेंटर में की गई थी।

मैगी को विभाग ने दी ससम्मान विदाई

मैगी को विभाग ने दी ससम्मान विदाई

पुलिस विभाग मे पदस्थ बेल्जियम शेफर्ड नस्ल का ट्रैकिंग पुलिस डॉग मैगी का जन्म एक जनवरी 2016 को भिलाई में हुआ था। जो 09 माह की कड़ी डॉग ट्रेनिंग के बाद 23 जून 2017 को पुलिस विभाग में पदस्थ हुआ था। आज गरियाबंद पुलिस बटालियन के निरीक्षक उमेश राय ने कर्मचारियों के साथ मैगी को ससम्मान कपड़े में लपेटरकर अंतिम संस्कार किया।

30 से अधिक मामलों में मैगी ने दिलाई सफलता

30 से अधिक मामलों में मैगी ने दिलाई सफलता

पुलिस अधिकारियों के अनुसार 05 वर्ष के कार्यकाल में मैगी के द्वारा 30 से अधिक चोरी और मर्डर के केश में अपराधियो को ढुुंढने में अहम भूमिका निभाया है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण 3 जनवरी 2021 को हुए अंधे कत्ल की गुत्थी को मैगी की मदद से सुलझाया गया था। इसके अलावा कई ऐसे मामलों में मैगी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसके लिए तत्कालिन पुलिस अधीक्षक ने मैगी को 2000 रूपये नगद से पुरस्कृत किया गया था।

भिलाई के फर्स्ट बटालियन में डॉग्स को दी जाती है कड़ी ट्रेनिंग

भिलाई के फर्स्ट बटालियन में डॉग्स को दी जाती है कड़ी ट्रेनिंग

छत्तीसगढ़ के सभी स्पेशल डॉग्स की कड़ी ट्रेनिंग भिलाई के ट्रेनिंग सेंटर में होती है। भिलाई के पहली बटालियन में इसके लिए विशेष ट्रेनिंग सेंटर तैयार किया गया है। जहां 6 महीनों की ट्रेनिंग के दौरान डॉग्स को नारकोटिक्स, ट्रैकर और स्नाइपर कैटेगरी की ट्रेनिंग दी जाती है। आपको बता दें कि भिलाई के फर्स्ट बटालियन में बाहर स्पेशल डॉग्स खरीदने के बजाय ट्रेनिंग सेंटर में ही ब्रीडिंग के माध्यम से डॉग्स में बढ़ोतरी हो रही है।

तीन कैटेगरी में होती है स्पेशल डॉग्स की ट्रेनिंग

तीन कैटेगरी में होती है स्पेशल डॉग्स की ट्रेनिंग

ट्रैकर कैटेगरी की ट्रेनिंग के लिए विशेष रुप से डॉग को तैयार किया जाता है। इनका उपयोग चोरी, हत्या, लूट, डकैती जैसे मामलों में किया जाता है। यह डॉग आरोपियों के गंध के अनुसार उन्हें ट्रैक करने की कोशिश करते है। वही हत्या के उपरांत शव या हथियार कपड़े के माध्यम से पुलिस को आरोपियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्नाइपर डॉग्स को विस्फोटक सूंघने दी जाती ट्रेनिंग

स्नाइपर डॉग्स को विस्फोटक सूंघने दी जाती ट्रेनिंग

स्नाइपर कैटेगरी में डॉग्स को विस्फोटक सूंघने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। यह स्नाइपर नक्सलियों, आतंकवादियों वाले क्षेत्रों में तैनात किए जाते हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सली क्षेत्रों में ज्यादातर स्नाइपर डॉग की तैनाती की गई है। जिन्हें नक्सलियों द्वारा लगाए गए, आईईडी सूंघने में महारत हासिल होती है। इन डॉग्स के कारण सैकड़ों जवानों और आम नागरिकों की जान बचाई जाती है।

सीमावर्ती इलाकों में की जाती है नारकोटिक्स डॉग की पोस्टिंग

सीमावर्ती इलाकों में की जाती है नारकोटिक्स डॉग की पोस्टिंग

नारकोटिक्स कैटेगरी में स्पेशल डॉग की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें मादक पदार्थों हथियारों आदि के सूंघने व महसूस करने की ट्रेनिंग दी जाती है। डॉग्स के आंखों में पट्टी बांध कर उन्हें ट्रेनिंग के दौरान शराब, गांजा, अफीम, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों को पहचानने की ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के बाद इन स्पेशल डॉग्स की पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में की जाती है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद, राजनांदगांव, कवर्धा और सरगुजा जैसे जिलों में दी जाती है।

शहरी इलाकों में 4 से 5 स्पेशल डॉग्स की होती है पोस्टिंग

शहरी इलाकों में 4 से 5 स्पेशल डॉग्स की होती है पोस्टिंग

गरियाबंद जिले के पुलिस विभाग के डॉग्स हैंडलर धर्मेंद्र बताते हैं कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 4 से 5 डॉग तैनात किए जाते हैं। इन इलाकों में वीआईपी ड्यूटी के अलावा अपहरण, लूट, हत्या जैसी घटनाएं होती रहती है। इसलिए शहरी क्षेत्रों में डॉग्स की आवश्यकता पड़ती है। वही सीमावर्ती व जंगल इलाकों में स्नाइपर व नारकोटिक्स की ट्रेनिंग वाले 3 से 4 स्पेशल डॉग्स की तैनाती आवश्यकता के अनुसार की जाती है।

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