सिविल इंजीनियरिंग के बाद जूता बनाने को मजबूर, सरकार से लगाई गुहार
चेन्नई, 19 जून। हर कोई उच्च शिक्षा इस उम्मीद के साथ हासिल करता है कि वह समाज में सम्मानपूर्वक जी सके और एक बेहतर जीवन व्यतीत कर सके। उच्च शिक्षा प्राप्त करके आप अच्छे रोजगार की उम्मीद करते हैं और आशा करते हैं कि आप अच्छी नौकरी मिलेगी। लेकिन क्या हो जब आप इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करें, लेकिन इसके बाद आपको सिर्फ 4-5 हजार रुपए बतौर सैलरी मिले और मजबूर होकर आपको मोची का काम करना पड़े। जी हां, ऐसा ही मामला तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में सामने आया है।

तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में रहने वाले कार्तिक ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और ग्रैजुएशन की डिग्री हासिल कर ली। कार्तिक बताते हैं कि मैं एक सिविल इंजीनियर हूं, लेकिन मुझे सिर्फ 4-5 हजार रुपए की नौकरी मिली थी, लेकिन जीवन व्यतीत करने के लिए यह पर्याप्त नहीं था। लिहाजा मुझे नौकरी छोड़नी पड़ी और अपने पिता के पुराने व्यवसाय को अपनाना पड़ा। कार्तिक अब नौकरी छोड़कर पिता के जूते बनाने के काम को करने के लिए मजबूर हैं।
कार्तिक शिवगंगा जिले में एक जूता बनाने की दुकान में काम करते हैं और जूते बनाते हैं। कार्तिक कहते हैं कि जब सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद मुझे नौकरी नहीं मिली तो मैंने अपने पिता के व्यवसाय को करने का फैसला लिया। अगर सरकार मुझे नौकरी देती है तो इससे मुझे काफी मदद मिलेगी। कार्तिक को सरकार से उम्मीद है कि उन्हें एक अदद नौकरी मिल जाए और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का मौका मिले। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि क्या कार्तिक की गुहार को कोई सुनता है या फिर उन्हें मजबूर जूता बनाकर ही अपना जीवन यापन करना पड़ेगा।












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