सुषमा स्वराज को इस सीट से उतारने की तैयारी में भाजपा हाईकमान!

Chandigarh news, चंडीगढ़। हाई प्रोफाइल सीट चंडीगढ़ के लिए कांग्रेस की ओर से पवन बंसल व आम आदमी पार्टी की ओर से हरामेहन धवन मैदान में डटे हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी अभी तक अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पा रही है। जिससे मौजूदा सांसद किरण खेर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि अब यहां से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का नाम भी टिकट के दावेदारों में प्रमुखता से उभरा है।

चंदीगढ़ सीट पर ये चेहरे हैं दावेदार

चंदीगढ़ सीट पर ये चेहरे हैं दावेदार

यहां मतदान के लिए करीब एक माह का समय ही बचा है। दो दिन बाद यहां से नामांकन भरने की प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है लेकिन भाजपा अभी तक अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पा रही है जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं के मन में बेचैनी बढ़ रही है। दरअसल, चंडीगढ़ चुनाव क्षेत्र से मौजूदा सांसद किरण खेर के खिलाफ सतपाल जैन व चंदीगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन मुखर हैं। यही वजह है कि टिकट के ऐलान में पेच फंस गया है। स्थानीय स्तर पर पूर्व डिप्टी मेयर व बाबा रामदेव के करीबी विनोद अग्रवाल भी आधे-अधूरे तरीके से मैदान में आए थे तो जगतप्रकाश नड्डा, पूनम ढिल्लों व सन्नी देओल के नाम भी सामने आए पर सभी चर्चा तक ही सिमट कर रह गए।

सुषमा स्वराज को चंदीगढ़ की दावेदारी!

सुषमा स्वराज को चंदीगढ़ की दावेदारी!

लेकिन अब जो नया दावेदार सामने आया है वो है सुषमा स्वराज। सुषमा स्वराज, जो सरकार में केंद्रीय विदेश मंत्री है व मध्यप्रदेश के विदिशा से सांसद हैं। चुनावी राजनीति से किनारा करते हुए इस बार चुनाव लड़ने से मना कर चुकी हैं ,लेकिन भाजपा हाई कमान उनके फैसले पर गौर करने की बजाए उन्हें चंडीगढ़ से चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रहा है। वैसे भी पार्टी हाई कमान ने उन्हें अपने लिए पूरे देश में किसी भी सीट का चयन करने की छूट दे रखी है। वर्ष 2014 में तत्कालीन स्थानीय भाजपा त्रिमूर्ति टंडन जैन धवन नें ऐसी ही परिस्थितियां पैदा कर रखीं थीं। भाजपा हाई कमान ने चंडीगढ़ कनेक्शन रखने वाली किरण खेर को उम्मीदवार बनाकर सबको चौंका दिया था। जिन्हें आरंभिक विरोध के बाद सबका साथ मिला व इसके बाद के इतिहास से सब अवगत हैं। सूत्रों के मुताबिक इसी इतिहास को दोहराने के लिए भाजपा हाई कमान चंदीगढ़ कनेक्शन वाले किसी अन्य उम्मीदवार को तलाश रहा है जो सुषमा स्वराज पर पूरी होती लग रही है।

अभी होना है नामांकन

अभी होना है नामांकन

वैसे 2014 व 2019 में दो विचित्र समानताएं भी हैं जिनमें तब भी स्थानीय भाजपा त्रिमूर्ति की भांति इस बार भी भाजपा त्रिमूर्ति में टिकेट के लिए खींचतान होना तथा सत्यपाल जैन की वकील बुद्धि का कमाल। पिछली बार उन्होंने किरण खेर का नाम आगे बढ़ाया था तो इस बार भी कहीं ना कहीं माना जा रहा है कि इस बार भी उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक की है। वैसे जैन सुषमा स्वराज को अपनी बहन का दर्जा देते है व निभातें भी हैं। दोनों छात्र जीवन में सहपाठी रहें हैं व वकालत की पढ़ाई भी इक्कठे ही की है। वैसे राजनीतिक पंडितों का कहना है कि राजनीति में कुछ पल का भी खासा महत्व होता है व बाजी किसी के भी हाथ लग सकती है।

चंदीगढ़ लोकसभा सीट के बारे में विस्तृत से जानिए

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