मालामाल हो रहीं वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां, फाइजर, बायोटेक, मॉर्डन को हर सेकंड हो रहा इतने डॉलर का फायदा
कोरोना काल में जहां हजारों लाखों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं, तमाम देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई, वहीं, दूसरी तरफ कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां कि इस समय खूब चांदी हो रही है।
नई दिल्ली, 16 नवंबर। कोरोना काल में जहां हजारों लाखों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं, तमाम देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई, वहीं, दूसरी तरफ कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां कि इस समय खूब चांदी हो रही है। मुफ्त COVID-19 वैक्सीन पहुंच के लिए अभियान चलाने वाले गठबंधन, पीपुल्स वैक्सीन एलायंस ने अनुमान लगाया है कि फाइजर, बायोटेक और मॉडर्न इस साल 34 बिलियन डॉलर का शुद्ध लाभ कमाएंगी। पीपुल्स वैक्सीन एलायंस के मुताबिक ये कंपनियां वैक्सीन बेचकर प्रति सेकंड $ 1,000 (लगभग 74,600 रुपए) कमा रही हैं।

देश-दुनिया में अभी करोड़ों लोगों को वैक्सीन लगनी बाकी
बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के बाद विश्वभर में टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है, ताकि जल्द से जल्द इस महामारी पर काबू पाया जा सके, और जब तक प्रत्येक नागरिक को वैक्सीन नहीं लग जाती तब तक इस महामारी का खतरा बना हुआ है और यही बात वैक्सीन निर्माता कंपनियों की चांदी कर रही है। दुनियाभर में वैक्सीन की भारी मांग है खास तौर से गरीब देशों में तो वैक्सीन लगवाने से भारी संख्या में लोग वंचित हैं। ऐसे में जैसे जैसे वैक्सीन की सप्लाई बढ़ेगी वैसे-वैसे इन कंपनियों का मुनाफा और बढ़ता जाएगा। गठबंधन, पीपुल्स वैक्सीन एलायंस के अनुमान के मुताबिक फाइजर, बायोएनटेक और मॉडर्न हर मिनट $65,000 का संयुक्त लाभ कमा रहे हैं। एलायंस का कहना है कि उसने यह रिपोर्ट इन फर्मों की कमाई की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की है।

अमीर देशों से कमा रहे पैसा, गरीब देश वैक्सीन से वंचित
बता दें कि फाइजर, बायोटेक और मॉर्डन अमीर देशों को अपनी वैक्सीन बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं, जबकि कम आय वाले देशों को वैक्सीन नहीं मिल पा रही हैं। पीपुल्स वैक्सीन एलायंस के मुताबिक कम आय वाले देशों में केवल 2 प्रतिशत लोगों को ही कोरोना की दोनों वैक्सीन लगी हैं। पीपुल्स वैक्सीन एलायंस ने कहा कि फाइजर और बायोटेक ने कम आय वाले देशों को अपनी कुल आपूर्ति का एक प्रतिशत से भी कम दिया है, जबकि मॉडर्न ने सिर्फ 0.2 प्रतिशत वैक्सीनों की आपूर्ति की है।

एस्टाजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन गरीब देशों की मदद में आगे
वहीं, एस्टाजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन कंपनियों ने बिना किसी लाभ के गरीब देशों को अपने टीके उपलब्ध कराए हैं। हालांकि दोनों ने घोषणा की है कि वे भविष्य में इस व्यवस्था को समाप्त कर देंगे क्योंकि महामारी अब आम हो गई है।

फंडिंग के बावजूद गरीब देशों को नहीं दी गई वैक्सीन बनाने की तकनीक
पीपुल्स वैक्सीन एलायंस ने कहा कि 8 अरब डॉलर से अधिक का पब्लिक फंडिंग प्राप्त करने के बावजूद, फाइजर, बायोएनटेक और मॉडर्न ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के माध्यम से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में उत्पादकों को वैक्सीन प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने से इनकार कर दिया है। इस कदम से वैक्सीन के उत्पादन और सप्लाई में इजाफा होता, वैक्सीन की कीमत भी कम होती और लाखों जिंदगियों को बचाया जा सकता था।












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