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Budget 2026: क्या सस्ती होगी आपकी फेवरेट कार? ऑटो सेक्टर को बजट से क्या उम्मीद? 'गेम चेंजर' साबित होगा संडे!

Budget 2026: फरवरी की पहली सुबह भारत के ऑटोमोबाइल बाजार के लिए बेहद अहम होने वाली है। एक तरफ भारत 'ग्रीन मोबिलिटी' (साफ ऊर्जा) की ओर बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ आम आदमी की बजट कारों और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री में थोड़ी सुस्ती देखी गई है।

ऐसे में 1 फरवरी का दिन न केवल कंपनियों के लिए, बल्कि अपनी पहली गाड़ी का सपना देखने वाले आम खरीदार के लिए भी 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।

Union Budget 2026 India

क्यों खास है बजट 2026?

ऑटो इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार नए टैक्स फ्रेमवर्क के तहत ऐसे कदम उठाएगी जिससे कारों और टू-व्हीलर्स की कीमतें कम हों। खास तौर पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की धीमी पड़ती रफ्तार को फिर से बढ़ाने के लिए बड़े प्रोत्साहनों की उम्मीद की जा रही है।

याद दिला दें कि बजट 2025 में सरकार ने लिथियम बैटरी बनाने के सामान पर कस्टम ड्यूटी (BCD) कम की थी। अब इस साल लोग यह देखना चाहते हैं कि क्या सरकार ओनरशिप कॉस्ट (गाड़ी खरीदने और रखने का खर्च) को और कम करेगी?

इंडस्ट्री के 'दिग्गजों' की मांगें

1. टैक्स के उलझे हुए स्ट्रक्चर को ठीक करना
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, वोल्वो कार इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ज्योति मल्होत्रा ​​ने कहा कि, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' को ठीक करना बहुत जरूरी है। आसान भाषा में-अगर कच्चा माल महंगा और तैयार गाड़ी पर टैक्स का तालमेल सही नहीं होगा, तो कीमतें बढ़ेंगी। इसे ठीक करने से भारत में गाड़ियां बनाना सस्ता और प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।

2. चार्जिंग स्टेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
वोल्वो कार इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ज्योति मल्होत्रा ने जोर दिया है कि सरकार का फोकस देशभर में चार्जिंग नेटवर्क फैलाने पर होना चाहिए। जब तक हर कोने में चार्जर नहीं होंगे, तब तक लोग पेट्रोल-डीजल छोड़कर इलेक्ट्रिक की तरफ नहीं आएंगे। साथ ही, उन्होंने ड्यूटी स्ट्रक्चर को तर्कसंगत बनाने की मांग की है ताकि ग्लोबल कंपनियां भारत में निवेश करें।

3. ग्राहकों के लिए लुभावनी स्कीमें
अन्य एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार को ऐसी योजनाएं लानी चाहिए जो सीधे ग्राहकों को फायदा पहुंचाएं। इससे लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने के लिए ज्यादा उत्साहित होंगे।

आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?

अगर सरकार इन मांगों पर मुहर लगाती है, तो:

  • सस्ते इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक: सब्सिडी और टैक्स राहत से टू-व्हीलर्स की कीमतें नीचे आ सकती हैं।
  • बजट कारों की वापसी: छोटी कारों पर टैक्स का बोझ कम होने से मध्यम वर्ग के लिए कार खरीदना फिर से आसान हो सकता है।
  • घरेलू उत्पादन (Localisation): जब पुर्जे भारत में ही बनेंगे, तो गाड़ियों की मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स भी सस्ते होंगे।

कुल मिलाकर, ऑटो सेक्टर को उम्मीद है कि यह बजट केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाएगा। यदि सरकार घरेलू निवेश और डिस्पोजेबल इनकम (आम आदमी के हाथ में बचने वाला पैसा) को सपोर्ट करती है, तो संडे का यह बजट भारतीय सड़कों की तस्वीर बदल सकता है।

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