Silver Gold Price: चांदी 4 लाख के पार, सोना 1.83 लाख पर रिकॉर्ड! निवेशक खुश,आम आदमी परेशान, क्यों उछली कीमत?
Silver Gold Price: दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक हलचल और आर्थिक अनिश्चितता का असर अब सीधे कीमती धातुओं पर दिखने लगा है। गुरुवार को घरेलू बाजार में चांदी ने ऐसा इतिहास रचा, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया था। वहीं सोना भी नई ऊंचाई पर पहुंच गया। निवेशक सुरक्षित ठिकाने की तलाश में तेजी से सोने-चांदी की ओर बढ़ रहे हैं और इसी का नतीजा है कीमतों में जबरदस्त उछाल।
चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड (Silver Price Hike)
दिल्ली में चांदी की कीमत पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक, चांदी गुरुवार को 19,500 रुपये यानी करीब 5 फीसदी की छलांग लगाकर 4,04,500 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। यह लगातार चौथा सत्र है, जब चांदी में तेजी देखने को मिली है।

साल की शुरुआत से अब तक चांदी की कीमतों में 1,65,500 रुपये यानी करीब 69 फीसदी का उछाल आ चुका है। साल के अंत तक 2.39 लाख रुपये प्रति किलो पर रहने वाली चांदी अब निवेशकों की पहली पसंद बनती दिख रही है।
सोना भी नई ऊंचाई पर, 1.83 लाख का आंकड़ा पार (Gold Rate Hike)
चांदी के साथ-साथ सोने ने भी नया कीर्तिमान बनाया। 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना एक ही दिन में 12,000 रुपये महंगा होकर 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों में जबरदस्त तेजी, कमजोर डॉलर और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
क्यों बढ़ रही है सोने-चांदी की चमक (why silver gold Price Hike)
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया इस वक्त भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक सुस्ती और अमेरिका से जुड़ी सख्त बयानबाजी ने निवेशकों को डरा दिया है। ऐसे में सोना और चांदी एक बार फिर सुरक्षित विकल्प बनकर उभरे हैं।
विशेषज्ञ गौरव गर्ग के मुताबिक, चांदी इस समय सोने से बेहतर प्रदर्शन कर रही है, जिसकी वजह मजबूत औद्योगिक मांग और कमजोर अमेरिकी डॉलर है। वहीं एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी का कहना है कि ETF में बढ़ता निवेश भी कीमतों को ऊपर ले जा रहा है।
भारत में घटा सोने की मांग, लेकिन बढ़ी वैल्यू
दिलचस्प बात यह है कि भारत में सोने की भौतिक मांग घट रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025 में भारत की गोल्ड डिमांड 11 फीसदी गिरकर 710.9 टन रह गई। 2026 में इसके 600 से 700 टन के बीच रहने का अनुमान है।
हालांकि, कीमतों में उछाल के चलते वैल्यू के लिहाज से मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 2025 में सोने की कुल वैल्यू 7.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल से करीब 30 फीसदी ज्यादा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सुनामी जैसी तेजी
वैश्विक स्तर पर भी सोने-चांदी की कीमतों में भूचाल आया हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 177 डॉलर उछलकर 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। चांदी भी 120 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले दो सालों में सोना 8,000 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
सोना और चांदी दोनों यह साफ संकेत दे रहे हैं कि दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर में है। अनिश्चितता जितनी बढ़ेगी, इन धातुओं की चमक उतनी ही तेज होगी। निवेशकों के लिए यह दौर जोखिम भरा जरूर है, लेकिन सुरक्षित निवेश के लिहाज से सोना-चांदी अब भी सबसे मजबूत विकल्प बने हुए हैं।












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