Rupee Fall Alert: गिर रहा रुपया या ग्लोबल गेम? SBI रिपोर्ट में खुलासा—700 अरब डॉलर का ‘कवच’ बचा रहा भारत
Rupee Fall Alert SBI: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच रुपये की गिरावट को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन क्या वाकई भारतीय रुपया कमजोर में है या यह सिर्फ वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है? स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट इस सवाल का सीधा जवाब देती है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 फरवरी के बाद रुपये में आई गिरावट असामान्य नहीं, बल्कि दुनिया की दूसरी करेंसी के मुकाबले संतुलित है। यानी जो दिख रहा है, उतना बड़ा खतरा नहीं है।
ग्लोबल ट्रेंड के साथ चल रहा रुपया?
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि हालिया गिरावट को कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। दरअसल, कई ऐसी मुद्राएं जो पहले मजबूत हुई थीं, उनमें अब ज्यादा तेज गिरावट आई है। ऐसे में रुपया अपेक्षाकृत स्थिर माना जा सकता है। एक्सपर्ट का मानना है कि रुपये को 'शॉक एब्जॉर्बर' यानी झटकों को संभालने वाली मुद्रा की तरह इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है। एक निश्चित स्तर के बाद यह रणनीति काम नहीं करती।

2013 जैसा संकट नहीं, हालात अलग
रिपोर्ट ने 2013 के मुद्रा संकट से मौजूदा हालात की तुलना करते हुए कहा कि उस समय स्थिति काफी अस्थिर थी। तब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर करने के लिए FCNR(B) जैसे विशेष कदम उठाने पड़े थे।
लेकिन फिलहाल ऐसा कोई बड़ा संकट नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विदेशी कर्ज के जरिए डॉलर जुटाने का तरीका अभी उचित नहीं दिखता, क्योंकि इससे उधारी की लागत बढ़ सकती है और हेजिंग का खर्च भी ज्यादा हो सकता है।
मजबूत फॉरेक्स रिजर्व बना ढाल
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके विदेशी मुद्रा भंडार को बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के पास 700 अरब डॉलर से ज्यादा का फॉरेक्स रिजर्व है, जो 10 महीने से ज्यादा के आयात को कवर करता है। साथ ही, शॉर्ट टर्म डेब्ट रिजर्व के 20% से भी कम है, जो एक मजबूत स्थिति को दर्शाता है। हालांकि इसमें 64.5% हिस्सा वोलाटाइल कैपिटल फ्लो का है, लेकिन इसके बावजूद रिजर्व इतना मजबूत है कि सट्टा गतिविधियों को रोका जा सकता है।
रुपये को संभालने के लिए क्या सुझाव?
रिपोर्ट में रुपये की अस्थिरता को कम करने के लिए कई अहम सुझाव दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना की 250-300 मिलियन डॉलर की जरूरत के लिए अलग विंडो दी जाए, ताकि बाजार पर दबाव कम हो सके।
इसके अलावा, RBI द्वारा बैंकों की ओपन पोजीशन को लेकर हाल में किए गए बदलाव से ऑनशोर और ऑफशोर मार्केट में अंतर बढ़ा है। घरेलू बैंक जहां ऑनशोर में मजबूत स्थिति में हैं, वहीं विदेशी बैंक उलट स्थिति में दिख रहे हैं।
रिपोर्ट में "ऑपरेशन ट्विस्ट" जैसे कदम उठाने की भी सलाह दी गई है, जिससे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म ब्याज दरों में संतुलन बना रहे। इसके साथ ही लिक्विडिटी को नियंत्रित रखने पर भी जोर दिया गया है, ताकि रुपये को स्थिरता मिल सके।
डर नहीं, सतर्कता जरूरी
कुल मिलाकर रिपोर्ट का संदेश साफ है रुपये में जो गिरावट दिख रही है, वह किसी बड़े संकट का संकेत नहीं है। यह वैश्विक परिस्थितियों का असर है, जिसे भारत अपनी मजबूत आर्थिक नींव और बड़े फॉरेक्स रिजर्व के दम पर संभाल सकता है।
हालांकि आने वाले समय में वैश्विक तनाव और पूंजी प्रवाह की दिशा रुपये की चाल तय करेगी, लेकिन फिलहाल भारत के पास इतना मजबूत सुरक्षा कवच है कि घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।












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