आखिर कौन हैं वो लोग, जो लगा रहे देश के सबसे बड़े बैंक SBI को चूना?

दूसरी तिमाही में बैंक का कुल बैड लोन यानी एनपीए बैंक के कुल लोन का 4.2 प्रतिशत हो गया है। इसकी कुल वैल्यू 10,341 करोड़ रुपए है।

नई दिल्ली। जहां एक ओर पूरे देश से कालेधन को खत्म करने की मुहिम चलाते हुए सरकार ने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक की हालत अभी भी खराब है।

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वित्त वर्ष 2016-17 की दूसरी तिमाही में भारतीय स्टेट बैंक का नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) एक साल पहले इसी समय के दौरान के एनपीए का दोगुना हो गया है। साथ ही, सितंबर में बैंक का मुनाफा भी 34 फीसदी घटा है।

दूसरी तिमाही में बैंक का कुल बैड लोन यानी एनपीए बैंक के कुल लोन का 4.2 प्रतिशत हो गया है। इसकी कुल वैल्यू 10,341 करोड़ रुपए है। आपको बता दें कि एक साल पहले इसी समय में भारतीय स्टेट बैंक का एनपीए 5,875 करोड़ रुपए था।

जहां एक ओर सरकार कालेधन पर इतनी सख्त होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर पब्लिक सेक्टर के इस भारतीय स्टेट बैंक को लगातार चूना लगाया जा रहा है। लाख कोशिशों के बावजूद बैंकों को चूना लगाने वालों पर लगाम नहीं लगाई जा पा रही है।

भारतीय स्टेट बैंक के निवेशक भी संभल-संभल कर निवेश कर रहे थे, लेकिन दूसरी तिमाही के नतीजों ने उन्हें भी डरा दिया। इसी का नतीजा रहा कि शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक के शेयर में 3 फीसदी की गिरावट आई है, जिसके बाद इसकी कीमत 272.90 रह गई।

जुलाई से सितंबर की दूसरी तिमाही में भारतीय स्टेट बैंक का मुनाफा करीब 34 फीसदी घटकर 2,538 करोड़ रुपए हो गया है। आपको बता दें कि एक साल पहले इसी समय के दौरान बैंक का कुल मुनाफा 3,879 करोड़ रुपए था।

ऐसी स्थिति में जरूरत है कि सरकार बैंकों के बढ़ते एनपीए पर भी ध्यान दे और ऐसे लोगों पर शिकंजा कसा जाए, जो लोग बैंकों को चूना लगाने का काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं कि एनपीए से सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक परेशान है, बल्कि सभी बैंकों इससे परेशान हैं। कुछ बैंकों का एनपीए कम है तो कुछ का अधिक है।

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