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सोमवार तक फाइल नहीं किया रिटर्न तो आपको नहीं मिलेंगे ये चार फायदे

अगर आपने नोटबंदी के दौरान यानी 9 नवंबर 2016 से 30 दिसंबर, 2016 के बीच 2 लाख या इससे ज्यादा रुपये अपने बैंक अकाउंट में जमा किया है तो 31 जुलाई तक आपको रिटर्न फाइल करना बेहद जरूरी है।

नई दिल्ली। इन्कम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। बावजूद इसके कई लोग विभिन्न वजहों से तय तारीख तक आयकर रिटर्न नहीं फाइल कर पाते हैं। हालांकि आयकर विभाग तेजी से आयकर नियमों में बदलाव कर रहा है। इसके मुताबिक अगर आईटीआर दाखिल करने में देरी होती है तो प्रस्तावित जुर्माना अगले साल से हो सकता है। वित्त वर्ष 2016-17 में रिटर्न के लिए ये जुर्माना लागू नहीं है।

तय समय पर भरें आईटीआर नहीं तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

हालांकि, आपको ये भी जानना जरूरी है कि अगर आपने सभी करों का भुगतान कर दिया है और इस साल आईटीआर देरी से दाखिल करते हैं तो कोई जुर्माना नहीं है, लेकिन आप तय तारीख पर रिटर्न दाखिल नहीं करने की वजह से निश्चित लाभ से छूट जाएंगे। अगर आपने नोटबंदी के दौरान यानी 9 नवंबर 2016 से 30 दिसंबर, 2016 के बीच 2 लाख या इससे ज्यादा रुपये अपने बैंक अकाउंट में जमा किया है तो 31 जुलाई तक आपको रिटर्न फाइल करना बेहद जरूरी है। वित्‍त वर्ष 2016-17 के सभी आईटीआर के लिए इसे मेंशन करना जरूरी कर दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो इनकम टैक्‍स विभाग क्‍लीन मनी ड्राइव के तहत नोटिस भेजकर आपसे पूछ सकता है कि आपने तय तारीख तक रिटर्न फाइल करके इस रकम की चर्चा क्‍यों नहीं की। 31 जुलाई तक अगर आपने आईटीआर फाइल नहीं किया तो आपको हो सकते हैं ये चार नुकसान...

एडवांस टैक्स/टीडीएस पर अप्रैल से जुलाई तक खो सकते हैं ब्याज

एडवांस टैक्स/टीडीएस पर अप्रैल से जुलाई तक खो सकते हैं ब्याज

अगर आप 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो आपको खुद के जरिए चुकाए गए एडवांस टैक्‍स/टीडीसी पर अप्रैल से लेकर जुलाई तक का ब्‍याज नहीं मिलेगा। अगर आप 31 जुलाई के एक दिन बाद भी रिटर्न फाइल कर देते हैं तो भी आपको अप्रैल, मई, जून और जुलाई में कम से कम चार महीने का ब्याज खो सकते हैं।

अपने घाटे को नहीं दर्शा सकते हैं

अपने घाटे को नहीं दर्शा सकते हैं

अगर आप तय समय की देरी से रिटर्न फाइल करते हैं तो आप अपने घाटे को (केवल हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को छोड़कर) आगे नहीं दिखा सकते हैं। आईटीआर में देरी से स्‍पेकुलेशन यानी वायदा समेत कारोबार, कैपिटल गेंस और आय के दूसरे स्रोतों से होने वाले घाटे को आगे नहीं दिखाया जा सकता है। अगर आपने इन मामलों में हर तरह के टैक्‍स समय पर चुकाए हैं तो भी आप उन्‍हें बाद में नहीं दर्शा सकते हैं।

टैक्स लायबिलिटी बची होने पर बढ़ सकती है मुश्किलें

टैक्स लायबिलिटी बची होने पर बढ़ सकती है मुश्किलें

अगर आपकी कोई टैक्‍स लायबिलिटी बची हुई है तो तय तारीख के बाद आईटीआर फाइल करने पर आपके ऊपर रिटर्न की तय तारीख के बाद हर महीने के हिसाब से एक फीसदी की पेनल्‍टी ठोकी जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि जितने महीने उतने फीसदी की पेनल्‍टी लगेगी यानी एक तरह से इसे भारी कहा जा सकता है। अगर समय से आईटीआर फाइल किया जाए तो इससे बचा जा सकता है। इस मामले में टैक्स अथॉरिटी की ओर से कार्रवाई की आशंका रहती है।

हो सकता है 5000 रुपए तक का जुर्माना

हो सकता है 5000 रुपए तक का जुर्माना

सबसे बड़ा झटका तब लग सकता है अगर आप 31 मार्च की तय तारीख तक आईटीआर फाइल नहीं करते हैं और इस देरी के लिए आप आयकर विभाग को सही वजह भी नहीं बता पाए हैं तो टैक्स अथॉरिटी आप पर 5000 रुपए तक का जुर्माना ठोंक सकता है।

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