मोदी सरकार ने लिए 3 बड़े फैसले, प्याज-चीनी और गेहूं की बढ़ती कीमतों के लिए क्या है मास्टरप्लान?
मौसम की मार ने प्याज के उत्पादन को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। जिसके कारण आम आदमी की थाली से प्याज गायब होता नजर आ रहा है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अंकुश लगाने और घरेलू बाजार में उनकी उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसले लिए हैं। जिसके तहत, सरकार ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
सरकार ने कहा कि नए साल यानी 2024 के मार्च महीने तक प्याज के निर्यात पर पूरी तरह से रोक रहेगी। देश के बाहर किसी भी तरह की प्याज की सप्लाई नहीं जाएगी। घरेलू बाजारों को सप्लाई में कोई कमी न आए इसलिए यह फैसला लिया गया है। इसकी मदद से बढ़ते दामों में गिरावट होगी।

इससे पहले, केंद्र ने प्याज के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए 800 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) तय किया था और घरेलू बाजार में मिठास की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चीनी के निर्यात पर भी गंभीर प्रतिबंध लगा दिया था।
चीनी के लिए एथनॉल पर रोक
इसके साथ ही चीनी मिलों और भट्टियों को 2023-24 के लिए इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस या सिरप का उपयोग करने से रोक दिया है। इसके अलावा, केंद्र से यह भी उम्मीद है कि वह भारतीय खाद्य निगम को मौजूदा 3 लाख टन के मुकाबले हर हफ्ते 4 लाख टन गेहूं बेचने की अनुमति देगा। सरकार ने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) को निर्देश दिया है कि बड़ी मात्रा में गेहूं रिलीज करे, जिससे खुदरा कीमतों पर काबू पाया जा सके।
क्या है निर्यात की 3 शर्तें ?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने निर्यात की 3 शर्तों पर छूट दी है। पहली, जो कंसाइनमेंट रोक के आदेश के पहले ही निर्यात के लिए लोड हो चुके हों। दूसरा, जिन कंसाइनमेंट के पेपर का रजिस्ट्रेशन हो चुका हो या कस्टम को दिए जा चुके हों। तीसरा, जिनके पेपर वेरिफिकेशन के लिए रखे गए हों। अर्थात किसी नए कंसाइनमेंट को निर्यात की कोई छूट नहीं है।












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